एसिडिटी (गैस) क्या है? | Acidity in Hindi

acidity in hindi

Acidity in hindi आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में और बदलती हुई जीवनशैली के कारन पेट से सबंधित कई बीमारिया होने लगाती है। इनमे से एक है एसिडिटी, एसिडिटी एक ऐसी समस्या होती है जो पेट में बनती है। यह इतनी खतरनाक होती है की रेजर ब्लेड को भी पिघला देती है, तो आप समझ ही सकते हो की यह शरीर के लिए कितना खतरनाक हो सकती है। एसिडिटी (गैस) एक बहुत ही गभीर समस्या है। यह समस्याए आमतौर पर तली-भुनी और मसालेदार खाना खाने की वजह से होता है। जब पेट में सामान्य से ज्यादा एसिड हो जाता है तो वह एसिडिटी का रूप धारण कर लेती  है।

पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड (hydrochloric acid) होता है, जो भोजन को टुकड़ो के रूप में तोड़कर बेक्टेरिया जैसे रोग जनकों को रोकने का काम करता है। पेट की अंदरूनी परत मजबूत होने के कारन हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के प्रति अनुकूलित होती है। आइए आज हम आप को एसिडिटी या पेट जलन के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से बताते है की एसिडिटी का इलाज कैसे करते है।

एसिडिटी (पेट में जलन) के लक्षण (Acidity Symptoms in Hindi)

एसिडिटी (acidity meaning in hindi) एक पेट से सबंधित बीमारी होती है। इसमें पेट में और सीने में जलन आदि प्रकार की समस्याए होती है। इसके लक्षण निम्नलिखित होते है।

  • सीने में जलन
  • पेट में जलन
  • खट्टे डकार
  • कब्ज होना
  • पेट में गैस बनना।
  • गले में जलन
  • बेचैनी महसूस करना।
  • मतली या उलटी होना।
  • पेट फूलना।
  • पेट में दर्द
  • घबराहट होना
  • सांसो में बदबू आना
  • काला मल या मल में खून आना।
  • सुखी खासी आना।

एसिडिटी (गैस) के कारण (Acidity Causes in Hindi)

एसिडिटी होने के कारण निम्नलिखित है।

  • एसिडिटी (acidity meaning in hindi) होने का मुख्य कारण खान-पान पर रहता है, तली हुई और मसाले की चीजे खाने से एसिडिटी (acidity meaning in hindi) या पेट जलने की समस्या होती है।
  • ज्यादा तले हुए पदार्थो का सेवन करने से भी एसिडिटी की समस्या होती है।
  • गर्भवस्था के दौरान एसिड रिफ्लेक्ट होता है। क्योकि इस अवस्था में अंदरूनी भागो पर दबाव बढ़ जाता है।
  • प्रेग्नेंसी में अधिक खाना खाने से भी एसिडिटी होती है।
  • इसमें कुछ अन्य जोखिम कारक भी शामिल है।
  • मोटापा बढ़ना
  • नमक का अधिक उपयोग करना।
  • धूम्रपान करने से।
  • फाइबर युक्त आहार का कम सेवन करना।
  • शराब या कैफीन जैसे पदार्थ का सेवन करना।
  • शारीरिक व्यायाम न करने से।
  • अत्यधिक खाना या तले हुए पदार्थ का सेवन करने से।

एसिडिटी (पेट में जलन) से बचाव (Acidity Prevention in Hindi)

हमारे खान पान और जीवनशैली में बदलाव करने से हम एसिडिटी होने से बचा सकते है।

पेट में जलन (एसिडिटी) के कुछ बचाव के कारण निम्नलिखित है।

  • अत्यधिक फल सब्जियों का उपयोग करना।
  • खाने को एक बार न खाकर थोड़ी -थोड़ी मात्रा में खाने से भी एसिडिटी से बचा जा सकता है।
  • रात में सोने से १ से २ घंटे पहले खाना खा लेना चाहिए।
  • एक दिन में कम से कम ३ से ४ लीटर पानी पिने से।
  • खाना खाने के पहले और बाद में आधे घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए।
  • कपडे हमेशा ढीले पहनना चाहिए।

एसिडिटी (पेट में जलन) का इलाज (Acidity Treatment in Hindi)

एसिडिटी और पेट में जलन के उपचार के लिए जीवन शैली में बदलाव और कुछ बाजार में दवाइयों के कारण भी एसिडिटी का इलाज किया जा सकता है। बहुत कम ही मामले ऐसे होते है जिनमे सर्जरी की आवश्यकता होती है।

दवाए

अम्ल को कम करने वाली दवाई:- आप के पेट में होने वाली अम्ल की मात्रा को कम करने के लिए दो प्रकार की दवाइयों का उपयोग किया जाता है। यह दवाइया पेट में जलन के लक्षणों को कम करने का काम करती है। इन दवाइयों में प्रोटोन पंप इनहिबिटर्स और दूसरी हिस्टामिन -2 रिसेप्टर एंटागोनिस्ट आदि शामिल है।

साधारण एंटीएसिड:- यह दवाइया ऐसी होती है जो एसिड की मात्रा को कम करने के लिए उपयोग की जाती है। यह दवाई मार्किट में किसी भी मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाती है। यह आप के पेट में होने वाले अम्ल को कम करने का काम करता है।

पोर्किनेटिक एजेंट्स:- ये दवाए इसोफेगस और पेट को खाली करने का काम करती है। जिसके कारण नली में रिफ्लेक्स होने के लिए कुछ नहीं बच पाता।

म्यूकोसोल प्रोटेक्टिव एजेंट्स:– इन दवाइयों का प्रयोग इसोफेगस में एक सुरक्षित परत बनाने में काम करता है। जिससे अम्ल इसोफेगस में जलन उत्पन्न नहीं हो पाता है।

एसिडिटी में परहेज

एसिडिटी होने पर क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। इसमें निम्नलिखित पदार्थ होते है।

  • मीठी चींजे जैसे शहद, चॉकलेट आदि।
  • मूंगफली और आखरोट
  • तले हुए पदार्थ।
  • कुछ प्रकार के मसाले जैसे:- लाल मिर्च, हरी मिर्च, काली मिर्च और दालचीनी।
  • नशीले पदार्थ जैसे शराब, टोबेको, गुटखा।
  • गैस से भरे पदार्थ
  • अनाज और साबुत दाल
  • चाय और कॉफी
  • निम्बू और संतरे।

एसिडिटी में क्या खाना चाहिए।

  • सब्जिया:- सब्जियों में भरपूर मात्रा में वसा और शुगर की मात्रा कम होती है। यह पेट में अम्ल के स्तर को कम करने का काम करता है। सब्जियों में विकल्प के तोर पर हरी बीन्स, ब्रोकली, पत्तागोभी, ककड़ी और खीरे आते है।
  • अदरक:- अदरक में सूजन और जलन विरोधी प्राकृतिक गूढ़ होते है जो एसिडिटी को कम करने के लिए उपयोग में लिए जाते है।
  • दलिया:- ओटमील में फाइबर से उत्कृष्ट होते है। जो अम्ल के अवशोषण को कम करने का काम करता है।
  • अंडे का सफ़ेद भाग:- अंडे का सफ़ेद भाग एसिडिटी के लिए बहुत फायदेमंद होता है। जिनको एसिडिटी की समस्याए है उनको अंडे का पीला भाग नहीं खाना चाहिए।
  • फल जो खट्टे ना हो:- ऐसे फल खाइए जो खट्टे न हो खरबूजे, केले और नाशपाती आदि खट्टे फल की तुलना में एसिडिटी को ट्रिगर करने की बहुत कम सम्भावना होती है।

एसिडिटी के घरेलु उपचार (Acidity ke gharelu upchar)

एसिडिटी की समस्या को दवाई लेने के साथ-साथ इसके कुछ घरेलु उपचार भी होते है जो निम्नलिखित है।

  • यदि आप नियमित व्यायाम और कुछ गतिविधिया करते हो तो आप को एसिडिटी की समस्या कम होने के चांस रहते है।
  • विटामिन बी और विटामिन E युक्त सब्जियों का अधिक सेवन करे।
  • खाना खाने के तुरंत बाद पेय पदार्थ का सेवन ना करे।
  • यदि आप बादाम का सेवन करते है तो यह आप के सीने के जलन को कम करने का काम करता है।
  • खीरा,ककड़ी आदि का सेवन अधिक करे।
  • पानी में निम्बू निचोड़कर पिने से एसिडिटी की समस्या का हल हो सकता है।
  • नियमित रूप से पुदीने का सेवन करने से एसिडिटी या पेट में जलन की समस्या हल हो सकती है।
  • नारियल के पानी का अधिक सेवन करे।

एसिडिटी के आयर्वेदिक इलाज (Acidity ke aayurvedic upchar)

  • अदरक का रस:- निम्बू और अदरक का रस शहद में डालकर पिने से पेट के जलन को शांत किया जा सकता है।
  • अश्वगंधा:- भूक की समस्या और पेट से संबधित बीमारियों को ठीक करने के लिए अश्वगंधा लाभदायक होता है।
  • बबुना:- यह पेट के जलन की समस्या को दूर करने का काम करता है।
  • लहसुन:- पेट से संबधित सभी बीमारियों के लिए लहसुन रामबाण का इलाज किया जाता है।
  • इलाइची:- सीने के जलन को कम करने के लिए इलाइची का उपयोग किया जाता है।
  • मेथी:- मेथी के पत्ते से पेट की जलन को ठीक करने का काम करती है।
  • हरड़:- यह पेट की एसिडिटी और जलन को कम करने का काम करती है।
  • सौंफ:- सौंफ के द्वारा भी पेट की समस्या को हल किया जा सकता है।
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