अर्जुन वृक्ष क्या है? (What is Arjun tree in Hindi)

arjun ki chaal

अर्जुन वृक्ष और अर्जुन की छाल

अर्जुन का वृक्ष (arjun tree) भारत के जंगलो में पाया जाने वाला और्वेदिक औषधीय पेड़ है। इसे विभन्न नामो से जैसे:- घवल,ककुभ,अर्जुन एवं नदी नालो के किनारे होने के कारण नदीसर्ज के नाम से भी जाना जाता है। सामान्य बोलचाल की भाषा में इसे कहुआ और सादड़ी भी कहते है| इसकी ऊंचाई लगभग ७०-८० फिट तक होती है। अर्जुन का वृक्ष अधिकतर हिमालय की पहाड़ियों के नदी नालो के किनारे पाए जाते है बिहार और मध्यप्रदेश के जंगलो में भी पाए जाते है। अर्जुन के वृक्ष (arjuna tree) की छाल का उपयोग औषधियों के रूप में भी किया जाता है । यह छाल बहार से सफ़ेद, अंदर से चिकनी , मोटी तथा हलके गुलाबी रंग की होती है। इसकी मोटाई लगभग ३-४ मिलीमीटर होती है। एक वृक्ष से छाल निकालने पर दुबारा तीन साल के चक्र में आती है। इस छाल का स्वाद खाने में कसेला, तीखा होता है एवं इसे गोदने में वृक्ष से दूध निकलता है।

अर्जुन के वृक्ष (arjun tree) का उपयोग होमयोपैथी में औषधि के रूप में किया जाता है| यह हृद से संबधित बीमारियों को दूर करने का काम करता है। अर्जुन के वृक्ष की लगभग १०-१५ प्रजातियां है कौन सी प्रजातीय का उपयोग कब करना है यह किसी जानकर व्यक्ति से सलाह लेकर ही उपयोग करे। वसंत ऋतु के समय इसे फल लगते है तथा इसके पत्ते अमरूद की पत्तियों जैसे लंबे नुकीले और आयताकार की होते है।

अर्जुन के पेड़ को Terminalia Arjuna भी कहा जाता है।

अर्जुन की छाल ( Arjuna bark in Hindi)

अर्जुन की छाल (arjun ki chaal) का उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों की रूप में किया जाता है इस छाल में लगभग २५-३०% टैनिम पाया जाता है । इस पेड़ की छाल में पोटेशियम, कैल्शियम और मेग्नेशियम की तत्व भी पाए जाते है। अर्जुन वृक्ष की छाल मुख्य रूप से हृद से सम्भंदित सभी बीमारियों को ठीक करने की लिए किया जाता है , इसके आलावा शरीर में होने वाली सभी बीमारिया जैसे:- कानदर्द,पेटदर्द ,बुखार ,पथरी,चार्म रोग आदि के उपचार में किया जाता है। त्वचा से सम्भदित रोगो को दूर करने में भी सहायक है। अर्जुन वृक्ष के छाल की चाय पिने से भी शरीर को स्वस्थ रखा सकते है।

अर्जुन की छाल के फायदे (Benefits of Arjun Chal in Hindi)

१) अर्जुन की छाल (arjun ki chaal) हृद से संबधित सभी रोगो को दूर करती है, और इस छाल का नियमित सेवन करने से स्ट्रोक क्र खतरे को कम करती है।
२) मासिक में अधिक रक्तस्त्राव हो रहा हो तो अर्जुन की छाल का एक चम्मच चूर्ण दूध में डालकर पिने से रक्तस्त्राव को रोका जा सकता है।
३) अर्जुन के पेड़ की पत्तियों का रस की बुँदे कान में डालने पर कान के दर्द को कम किया जा सकता है।
४) अर्जुन की छाल (arjun ki chaal) का उपयोग त्वचा से संबधित कील, मुहासे आदि में भी किया जाता है।
५) इसका काढ़ा बनाकर छाले, घाव, अल्सर और पेट से संबधित सभी रोगो को ठीक किया जा सकता है।
६) टूटी हुई हड्डियों पर इसका लेप लगाने से ठीक किया जा सकता है।
७) अर्जुन की छाल (arjun ki chaal) का काढ़ा पिने से पिशाब से संबधित रोगो को दूर किया जा सकता है।
८) यह कोलेस्टाल को कम करता है
९) यह उच्च रक्तचाप को कम करता है।
१०) छाल का सेवन करने से शरीर बल मिलता है।
११) यह वजन को कम करता है
१२) यह दिल की माशपेशियों को मजबूत करता है।
१३) यह कर्दिओटोनिक है।
१४) शरीर में विष होने पर छाल का काढ़ा फायदेमंद होता है।
१५) लिवर सिरोसिस में इसे टॉनिक के रूप में प्रयोग करते है।

अर्जुन की छाल के नुकसान (side effect of Arjun Ki Chal in Hindi)

अर्जुन की छाल से उच्च रक्तचाप और शरीर में शुगर की मात्रा को कंट्रोल तो करता है। परन्तु आप को यह भी ध्यान रखना होगा यदि आप को शुगर की प्रॉब्लम है तो इसका सेवन अधिक मात्रा में ना करे जिससे आप की शुगर लेवल कम हो जाये और आप कोमा में छाले जाये।
यह बात तो सही है की अर्जुन वृक्ष की छाल का उपयोग करने से मोटापा कम क्र सकते है,परन्तु अधिक वजन कम करने से आप की हड्डियों में प्रॉब्लम हो सकती है। जिससे आप का स्पाइन भी डैमेज हो सकता है। अर्जुन वृक्ष की छाल को उपयोग में लेन से पहले किसी और्वेदिक जानकर से सलाह अवश्य ले।

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