ऑटिज्म क्या है? जानिए इसके कारन, लक्षण और उपाय | Autism Symptoms, Causes and Treatment in Hindi

ऑटिज्म एक ऐसी बीमारी है जोकि बच्चों में सबसे ज्यादा पाई जाती हैं, क्योंकि यह एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर हैं।यह एक मानसिक बीमारी है जो कि सामान्य तौर से बच्चों में जन्म से 3 वर्ष के भीतर अपना असर दिखाना शुरू कर देती हैं।यदि आपका बच्चा भी आपकी बातों पर कोई भी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया ना देता है यानी कि आपका बच्चा किसी से बात करने में या फिर समाज के साथ अन्य बच्चों की तरह गुण मिलने मैसेज कुछ आता है उसे किसी प्रकार की परेशानी होती है तो आप समझ जाइए कि यह ऑटिज्म के कारण होता है। इससे पीड़ित बच्चे जिनका आइक्यू लेवल बहुत ज्यादा भी हो सकता है सामान्य बच्चों से कम भी लेकिन वह सामाजिक तौर पर घुलने मिलने में काफी विचलित नजर आते हैं।ऑटिज्म बच्चे के सामान्य तौर से उसके मानसिक विकास को रोक देता है जिससे बच्चे का विकास सामान्य बच्चों की तुलना में काफी धीरे-धीरे होता है। तो चलिए जानते हैं ऑटिज्म के बारे में पूरी जानकारी –

ऑटिज्म होने के कारण (Autism Causes in Hindi)

ऑटिज्म कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो समय के साथ इसके कारणों का पता लग जाए बल्कि यह बीमारी गर्भावस्था में ही अपने दिखने शुरू हो जाती है। जब कोई महिला गर्भावस्था में होती हैं तो उसके बच्चे को सही मात्रा में आवश्यक पोषक तत्व विटामिन और प्रोटीन ना मिलने के कारण बच्चा इस बीमारी का शिकार हो जाता है। इसके अलावा जेनेटिक जींस में बदलाव होने के कारण भी ऑटिज्म बच्चों में न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर पैदा करता है जिससे उन्हें सोचने समझने और आई क्यू लेवल भी कम हो जाता है।गर्भावस्था में मां के द्वारा गलत खानपान और नशे के कारण उसकी संतान को ऑटिज्म होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। वर्तमान में प्रदूषित पर्यावरण और जन्म के समय बच्चे को सही मात्रा में ऑक्सीजन ना मिल पाने के कारण भी ऑटिज्म हो सकता है। हालांकि अभी तक इसका वैज्ञानिक रूप से पता नहीं लगाया गया है कि ऑटिज्म का प्रमुख कारण क्या है यह कैसे होता है।

ऑटिज्म के लक्षण (Autism Symptoms in Hindi)

ऑटिज्म के लक्षण पता कर पाना काफी मुश्किल होता है क्योंकि इसके लक्षण बच्चे के 6 महीने से लेकर 3 साल के भीतर दिखाई देना शुरू हो जाते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके लक्षण –

  • इससे पीड़ित बच्चे का चेहरा किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में काफी समय लगाते हैं और उन्हें यह भी पता नहीं लगता है कि सामने वाला क्या बोल रहा है यानी कि उसके हाव भाव क्या है।
  • इससे पीड़ित बच्चे हमेशा एकांत में रहना पसंद करते हैं उन्हें किसी भी प्रकार की सामाजिक कार्यकारिणी में शामिल होने में कोई शौक नहीं होता है वह लोगों से मिलने मैं भी शर्माते हैं ।
  • बच्चे का अजीब अजीब प्रकार से क्रिया करना यानी कि खेलने वाले खिलौनों को सूंघना या फिर उन्हें चाटते रहना।
  • यदि बच्चा रोने लगता है तो फिर वह रोने ही लगेगा और ग्रास में लगता है तो फिर वह हंसता ही रहेगा यह भी ऑटिज्म के लक्षण में शामिल है।
  • बच्चे कभी भी आपकी आवाज पर ध्यान नहीं देते हैं उन्हें आपके हाव-भाव समझने में दिक्कत होती हैं उन्हें आपकी आवाज सीखने में परेशानी होती हैं और वह हमेशा अजीब अजीब आवाजें निकालता है।
  • इसके अलावा आपके बच्चे का विकास सामान्य बच्चों की तुलना में काफी धीरे धीरे होने लगता है ऐसे में आप जल्द से जल्द किसी मनोचिकित्सक से संपर्क कीजिए।

ऑटिज्म के प्रकार – (Types of Autism in Hindi)

ऑटिज्म तीन प्रकार का होता है – 

  1. ओटेस्तिक विकार (Autistic Disorder)
  2. एस्पुरजर सिंड्रोम   (Espousal Syndrome)
  3. व्यापक विकास विकार (Comprehensive Development Disorder)
  1. ओटेस्टिक विकार – 

इस बीमारी को क्लासिक आत्म केंद्रित कहा जाता है जो कि ऑटिज्म का एक प्रकार होता है। इस प्रकार की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति सामाजिक और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यानी कि ज्यादा लोगों के बीच आने से घबराते हैं। उन्हें हमेशा अंदर ही अंदर ही डर रहता है अपने असामान्य व्यवहार के लिए क्योंकि उनकी रुचियां अन्य सामान्य बच्चों से काफी अलग होती।

  1. एस्प्रूजेर सिंड्रोम – 

एस्पर्जर सिंड्रोम वाले लोगों में आमतौर पर सामान्य व्यक्तियों से कम बौद्धिक क्षमता होती हैं यानी कि आई क्यू लेवल काफी कमजोर होता है।उन्हें किसी भी प्रकार की कोई भी चीज या फिर आओ आओ समझने में काफी समय लगता है और वापस उसके लिए प्रतिक्रिया भी सही ढंग से नहीं दे पाते हैं।इसके अलावा उन्हें विकलांगता की भी परेशानी हो सकती हैं।

  1. व्यापक विकास विकार – 

स्कोर एपिग्लोटिस या फिर पीडीडी a9s भी कहा जाता है। व्यापक विकास विकार से पीड़ित व्यक्ति लगभग सामान्य लोगों की तरह ही होता है। उसमें बस थोड़े से ही कुछ कमियों के विकसित होने की परेशानी होती है अन्यथा वह सामान्य लोगों की तरह ही होते हैं। इन लोगों में लोगों को समझने की समझ होती हैं लेकिन उन्हें एक ही चीज को बार बार करना काफी अच्छा लगता है।

ऑटिज्म का इलाज (Autism Treatment in Hindi)

बचपन की समय में ही इस बीमारी के लक्षण दिखाइए देने शुरू हो जाते हैं और यह एक दो साल के बच्चे मैं आमतौर पर हो जाते हैं।ऐसे में आपको सबसे पहले मनोचिकित्सक से संपर्क करना बहुत ही जरूरी होता है ताकि आप अपने बच्चे की अवस्था में सुधार लाने के चांसेस बढ़ सके।

  • यदि आपका बच्चा बोलने में हकलाता है या फिर सही ढंग से नहीं बोल पाता है तो उन्हें आप इसरो के जरिए बात कर सकते हैं। धीरे-धीरे वह शब्द भी बोलना सीख जाएगा।
  • इससे पीड़ित बच्चों को कभी भी जल्दबाजी में सुधारने की कोशिश ना करें यह आपके बच्चे के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।
  • इससे पीड़ित बच्चों पर हमेशा शांति से व्यवहार करें और उन्हें प्यार से बात करें ना कि गुस्से में। उन्हें हमेशा किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी ना आने दे और जितना हो सके मानसिक तनाव से दूर रखें।
  • इससे पीड़ित बच्चों पर आपको हर समय नजर रखनी होगी क्योंकि वह कभी भी कुछ भी कर सकता है और उन्हें पता भी नहीं चलता है कि वह करने क्या जा रहा है।
  • इसके अलावा आप मनोचिकित्सक द्वारा दी गई दवाइयां का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और जितना हो सके बच्चों को शारीरिक खेल के लिए प्रोत्साहित करें।

इस प्रकार आप कुछ हद तक ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे को वापस सामान्य बच्चों की स्थिति में ला सकते हैं लेकिन ऑटिज्म से ग्रसित लोगों और बच्चों का ठीक हो पाना बहुत ही मुश्किल होता है।यह कोई आम बीमारी की तरह नहीं है यह विकास से संबंधित बीमारी है जो हमारे विकास को ही रोक देती हैं जिससे हमें आगे सोचने समझने की भी क्षमता में काफी परेशानी आती हैं। ऐसे में आप और ना मानकर धीरे-धीरे अपने बच्चे को समझाएं और उन्हें प्यार से सामान्य करने की कोशिश जारी रखें।

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