What is Piles – बवासीर (Bawaseer) क्या है – Piles Meaning in Hindi

bawasir piles meaning in hindi

बवासीर (piles in hindi) का रोग आज के समय में काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। यह रोग ज्यादातर वृद्ध व्यक्ति को होता था वही आज के समय में कम उम्र के व्यक्ति को भी होता जा रहा है। यह बीमारी महिलाओ की अपेक्षा पुरुषो को अधिक होती है। यह बीमारी ज्यादातर ४५ से ६५ के बीच की उम्र के लोगो को होती है और बच्चो को भी हो सकती है।

इसलिए यह एक चिंता का विषय है। बवासीर (piles in hindi)  का कारण है तनावपूर्ण और बिगड़ी हुई जीवनशैली  क्योँकि आजकल लोगो की दिनचर्या बिगड़ती ही जा रही है| न कोई खाना खाने का उचित समय  है, न ही फ्रेश होने का। जब किसी व्यक्ति का प्रतिदिन सही ढंग से पेट साफ़ नहीं हो पाता है तो बवासीर जैसे रोग से पीड़ित होने की संभावना बढ़ जाती है। यह मलद्वार (गुदाभाग) में होने वाली एक बहुत ही पीड़ादायक बीमारी है। इस रोग से ग्रसित व्यक्ति को निरंतर पीड़ा होती रहती है। इसे पाइल्स (bawasir) या  हेमोर्रोइड्स के नाम से भी जाना जाता है। पाइल्स को आयुर्वेद में अर्श नाम से भी जानते है। इसका  दर्द असहनीय होता है। पाइल्स एक तरीके का स्वेलिंग  है और ये होती है आपके ऐनस रीजन में यानि कि रेक्टप के बाद जब मलद्वार आता है तो वहां पर जो नसे होती है वो फूल जाती है।

इसके कई कारण हो सकते है जैसे कीआपको लगातार काफी दिनों या काफी सालो से कब्ज रहे तो आपको पाइल्स के होने का खतरा बढ़ जाता है और बहुत सारे  लोग बवासीर से ग्रसित हो जाते है।

दूसरा कारण गुरुत्वाकर्षण होता है। उसके कारण भी कभी भी पाइल्स हो जाता है।

तीसरा कारण है गर्भवती महिलाये होती है उनके uterus पर जो दवाब पड़ता है। तो मलद्वार(गुदाभाग) की तरफ काफी दवाब पड़ता है।जिसकी वजह से भी पाइल्स होने की संभावना रहती है।इसका मुख्य कारण है कब्ज। अगर आपको कब्ज या पाइल्स होने की संभावना है तो आप पहले कब्ज को दूर करे ताकि आप पाइल्स (piles meaning in hindi) जैसी बीमारी से बच सके। और जिन व्यक्तियों का खाना पीना ढंग से नहीं हो पाता,खुद के लिए समय नहीं है, बॉडी के लिए समय नहीं है, फ्रेश सही से नहीं हो पाते है। सुबह -सुबह बहुत चिड़चिड़ापन रहता है। पेट साफ़ नहीं हो पाता है इस वजह से भी बवासीर होने की शिकायत बढ़ जाती है।

बवासीर (piles meaning in hindi) जब काफी गंभीर हो जाती है। तो नाभि,चेहरा,गुदाद्वार,हाथ-पैर में सूजन आ जाती है। बवासीर (bawaseer) के मरीज को कब्जियत, छाती में दर्द, खांसी, बुखार, खाना खाने का मन नहीं होना, उल्टी, बहुत अधिक रक्त श्राव आदि की समस्या होने लगती है। मलद्वार पक जाता है और बहुत ही दर्द और पेट में बहुत ही गैस बनने  लगती है जिससे पूरा शरीर शिथिल पड़ जाता है।

बवासीर दो प्रकार का होता है –

१.खूनी बवासीर या आंतरिक बवासीर(internal haemorrhoids )

२.बादी बवासीर या बाहरी बवासीर (external haemorrhoids )

खूनी बवासीर या आंतरिक बवासीर –

खूनी बवासीर को आद्र बवासीर भी कहते है खूनी बवासीर(piles meaning in hindi)  में रेक्टम के अंदर अर्श होता है जिसे हम बहार से नहीं देख सकते और ना ही अनुभव कर सकते है।  इसमें मस्से से रक्त निकलता है मतलब मस्से से खून बहता है। यह म्यूकस मेम्ब्रेन से ढका रहता है। खूनी बवासीर में ज्यादा दिक्कत होती है। जब मस्से मल के बोझ से दबते है तो मलद्वार से खून निकलता है और बहुत तेज दर्द भी होता है। जो मस्से होते है वो बाहर आने लगते है। फ्रेश होने के बाद वो खुद ही अंदर चले जाते है। कभी -कभी मस्से बाहर निकलने के बाद अंदर नहीं जा पाते है और बाहर ही निकले रहते है तब रोगी को बहुत ज्यादा दर्द होता हैऔर मस्सो को हाथ से भीतर करना पड़ता है। जिससे खून अधिक निकलने से रोगी पीला,हड्डी के ढांचे जैसा लगने लगता है।

मस्सो से पीड़ित रोगी को बहुत दर्द,जलन,खुजली,सूजन बानी रहती है।

पाइल्स (piles in hindi) में से खून निकलने से मरीजों का उत्साह कम हो जाता है। शक्ति क्षीण होने लगती है। भूख भी कम लगने लगती है। प्रसव के दौरान महिला बच्चे को जन्म देते समय अधिक जोर लगाती है। तो उसे खूनी बवासीर होने की संभावना अधिक रहती है। पाइल्स (piles in hindi) में दर्द तो होता ही हैऔर शरीर का खून भी व्यर्थ में निकल जाता है। इस प्रकार की बवासीर (bawasir) की आंतरिक बवासीर के नाम से भी जाना जाता है।

बाहरी बवासीर या बादी बवासीर –

बादी बवासीर (bawaseer) में ज्यादातर पेट ख़राब ही रहता है और कब्ज भी रहता है। बादी बवासीर को सूखा बवासीर (bawaseer) भी कहा जाता है। बादी बवासीर (bawaseer) में पेट में एसिडिटी (गैस) बनती रहती है। यह प्रथम गुदा बलि में होती है। इसमें मस्सो में रक्त नहीं निकलता है। इसके मस्से आसानी से देख सकते है।इसमें खुजली,शरीर में बेचैनी,जलन, दर्द,काम में मन नहीं लगना ऐसा लगने लगता है। इसमें मस्से अंदर होने के कारण मलद्वार का रास्ता छोटा होता है। और प्रेशर पड़ने पर मलद्वार का रास्ता फट जाता है और वहां घाव हो जाता है। इसमें बहुत जलन और दर्द भी होता है जिससे असहनीय वेदना होती है।

जब ये मस्से दबते है तब रोगी दर्द से छटपटाने लगता है। और आसानी से चल भी नहीं सकता है। बैठने में भी उसे तकलीफ होती है। बादी बवासीर के लिए उचित इलाज की आवश्यकता पड़ती है।अगर यह फिर भी ठीक नहीं होती है तो इससे  कैंसर भी हो जाता है तब और भी भयानक समस्या उतपन्न हो जाती है। रोगी को चमड़ी,मुख काला,पीला और सफ़ेद  पड जाता है। अगर बवासीर बहुत सालो से होने पर भगन्दर हो जाता है। इसे इंग्लिश में फिस्टुला कहते है। इस बवासीर (piles meaning in hindi) को बाहरी बवासीर (hemorrhoids in hindi) के नाम से भी जानते है।

बवासीर के लक्षण, पाइल्स के लक्षण-( Symptomes Of Piles In Hindi ) – जब रोगी को शुरुआत में बवासीर रोग होता है तब क्या होता है। 

१. गुदा के आस-पास मस्से या गांठ होना ।

२. मल त्यागते समय गुदाद्वार में खून आना,खून बूँद बूँद कर के निकलता है कई बार खून की धार बन जाती है ।

३. गुदा के आस – पास खुजली होना,खुजली लगातार या रुक -रुक कर हो सकती है।

४. मस्सो में से लगातार खून निकलना।

५. बवासीर होने पर कई बार रोगी को मल त्यागने के बाद भी ऐसा लगता है क़ि उसका पेट अभी भी साफ़ नहीं हुआ है।यह बवासीर के मस्से होने का लक्षण (bawaseer ke lakshan) है।

६. बार -बार मल त्यागने की इच्छा होना लेकिन मल त्यागते समय मल न निकलना ।

७. गुदा से एक बलगम जैसा श्राव निकलना ।

८. बादी बवासीर में मस्से काले रंग के होते है।बादी बवासीर के शुरुआती लक्षणों (bawaseer symptoms) में रोगी को गुदाद्वार में खुजली होने लगती है।

९. खुनी बवासीर में गुदाद्वार के अंदर सूजन होती है। खूनी बवासीर के मस्से खूनी सुर्ख होते है और उनसे खून निकलता है।

१०. बाहरी बवासीर में गुदाद्वार के बाहर की ओर के मस्से मोटे दानो जैसे हो जाते है।

११. कब्ज के कारण शरीर में बवासीर जैसी घातक बीमारियों के साथ -साथ पैरासाइट्स भी डेवलप हो जाता है।

१२. खाने पीने की गलत आदतों से भी बवासीर होने की सम्भावना बढ़ जाती है। पानी कम पीने से बवासीर (piles meaning in hindi) का खतरा बढ़ता है।

१३. लम्बे समय तक कब्ज रहने से क्रॉस डीसीज हो सकती है।

१४. सख्त मल / मलावरोध होने पर शुद्ध घी के साथ शुभ्रभस्म लेने से पाइल्स (bawaseer) में लाभ मिलता है।

यदि लम्बे समय तक बवासीर (symptoms of piles in hindi) को इगनोर किया जाये और उसका सही इलाज न किया जाये तो  पाइल्स के कारण कुछ गंभीर समस्याए जैसे अनीमिया, खून की कमी और ऊतकों का मरना हो सकती है।  पाइल्स  के कारण गुदा मलाशय और पेट के कैंसर होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है। बवासीर होने पर या पाइल्स के लक्षण (bawaseer ke lakshan) पाए जाने पर बिना किसी संकोच के डॉक्टर को पूरी बात बताये और इसका उचित इलाज कराये।

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