ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) के लक्षण,कारण और उपचार | Breast Cancer Symptoms, Causes Treatment in Hindi

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Brest Cancer in Hindi ब्रेस्ट कैंसर या जिसे हम स्तन का कैंसर भी कहते है। यह बहुत ही गंभीर बीमारी होती है, और यह महिलाओं में बहुत तेजी से फैलती है| ब्रेस्ट कैंसर (brest cancer) की बीमारी पच्छिमी देशो की अपेक्षा भारतीय महिलाओं में ज्यादा पाई जाती है दूसरे देशो के अलावा भारत देश में महिलाओं में औसतन आयु ४०-४५ वर्ष होती है, जो की दूसरे देशो की महिलाओं से 10 साल कम है।

महिलाओं में होने वाला स्तन कैंसर, इनवेसिव कैंसर (invasive cancer) से आम है। यह भारत में महिलाओं को होने वाले कैंसर का १५% और इनवेसिव कैंसर का ३०% भाग होता है। हरसाल दुनियाभर में कैंसर के कारण होने वाली मृत्यु का २०% स्तन कैंसर से होती है।

वर्तमान समय में भारत में ब्रेस्ट कैंसर एक आम प्रकार की बीमारी हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रो में भी स्तन कैंसर अधिक मात्रा में होने लगा है। भारत में महिलाओं को होने वाले कैंसरो में २५% से ३०% ब्रेस्ट कैंसर होता है, जो बहुत ही बड़ी गंभीर समस्या है।

ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) क्या होता है कैसे होता है ? (Breast Cancer in Hindi)

ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) तेजी से फैलने वाली गंभीर बीमारी होती है। जब शरीर की कोशिकाओं के विकास करने वाले जींस (jeans) म्यूटेशन में बदल जाते है, तो वह कैंसर का रूप धारण कर लेते है। म्यूटेशन की वजह से कोशिकाए अनियंत्रित और विभाजित हो जाती है,और वह गुणन करने लगती है। कोशिकाए गुना करती जाती है जिससे स्वस्थ कोशिकाओं की जगह असामान्य कोशिकाए बनने लगती है। जिसके कारण ट्यूमर (brain tumour) होने की संभावना बढ़ जाती है।

ब्रेस्ट कैंसर, स्तन के कोशिकाओं में उत्पन्न होता है। यह कैंसर आम तौर स्तन के ल्युबुस  या डक्ट्स से बनता है। ये ऐसी ग्रंथिया होती है, जिसमे दूध का निर्माण होता है, और जो दूध को ग्रंथियों के निप्पल्स तक पहुंचाने का काम करता है। ब्रेस्ट कैंसर वसायक और रेशेदार स्तन ऊतकों में भी बन सकता है, जिसे स्ट्रोमल टिश्यू भी कहा जाता है। अनियंत्रित कैंसर के कारण कोशिकाए स्तन कैंसर ऊतकों पर प्रहार करने लगती है और बाहरी लिम्फ नोड्स तक पहुंचाने का कार्य करते है। लिम्फ नोड्स कोशिकाए शरीर के अन्य भागो तक पहुंचाने का काम भी करते है।

ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) के लक्षण (Breast Cancer Symptoms in Hindi)

स्तन कैंसर का सबसे बड़ा लक्षण स्तन या ब्रेस्ट में सूजन या गाठ का बनना होता है। यह गाठ कभी- कभी महसूस भी नहीं होती है,परन्तु इसे छूने पर यह महसूस होती है। इस गाठ को मेमोग्राफी के द्वारा पता लगाया जा सकता है। ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण (Breast Cancer Symptoms in Hindi) निम्नलिखित भी होते है।

  • स्तन की त्वचा पर गुठलिया या लाल पड़ना।
  • स्तन में सूजन आना।
  • स्तन में गाठ या ऊतकों का मोटा होना।
  • निप्पल में से दूध के अलावा किसी अन्य पदार्थ का बाहर निकलना।
  • निप्पल में सूजन होना।
  • अचानक से ब्रेस्ट का आकर बढ़ जाना।
  • ब्रेस्ट से खून निकलना।                                       (अधिक जानकारी :- कैंसर कैसे होता है ? इसके लक्षण और इलाज )
  • निप्पल्स या स्तन की त्वचा का छीलना।
  • निप्पल्स का बाहर की तरफ न होकर अंदर की तरफ होना।

ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) के प्रकार  (Types of Breast Cancer in Hindi)

ब्रेस्ट कैंसर कई प्रकार से होता है, और इनके प्रकार निम्नलिखित है।

लोब्यूलर कार्सिनोमा इन सीटू (Lobular Carcinoma in situ (lcis)):- यह एक ऐसा कैंसर होता है जो दूध बनाने वाली ग्रंथियों में होता है और यह अभी तक आस-पास की ग्रंथियों तक नहीं फैला है।

इनवेसिव डक्टल कार्सिनोमा (Invasive Carcinoma in situ):– यह आम प्रकार का स्तन कैंसर होता है। यह दूध वाली ग्रंथियों में बनता है तथा आस-पास के ऊतकों पर भी प्रहार करता है। जब दूध वाली नलिकाओं से कैंसर बाहर फैलता है तो यह दूसरे अंगो में भी फैलने लगता है।

डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू (Ductal Carcinoma in situ):- यह एक प्रकार का नॉन-इनवेसिव (Non-invasive) अग्रगामी होता है। यदि आप को डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू हुआ है, तो यह स्तन को लाइन करने वाले डक्ट्स (uctas) में बदल जाता है और कैंसरग्रस्त जैसे लगने लगते है। परन्तु यह कैंसरग्रस्त कोशिकाओं की तरह उन ऊतकों तक नहीं पहुंच पाते है।

इनवेसिव लोब्यूलर कार्सिनोमा (Invasive Lobular Carcinoma ):- यह स्तन कैंसर दूध बनाने वाली ग्रंथियों में बनता है। यदि आप के कैंसर का इलाज ILC के द्वारा किया गया है, तो इसका अर्थ यह होता है की कैंसर अबतक आप के आस -पास के ऊतकों तक फैल गया है।

ब्रेस्ट कैंसर के कारण (Breast Cancer Causes in Hindi)

अभी तक ऐसा कहा जाता है की कोई भी विशेषज्ञ स्तन कैंसर का पूरी तरह से कारण नहीं ढूंढ पाया है। निम्नलिखित कुछ ऐसे कारण है जो स्तन कैंसर की समस्या को बढ़ा सकता है।

उम्र का बढ़ना

जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती जाती है वैसे -वैसे उनमे स्तन कैंसर बढ़ने का खतरा बढ़ता जाता है। भारत में ८०% महिलाए ऐसी है, जिनको ५५ साल की उम्र के बाद स्तन कैंसर की बीमारी होती है।

समय से पहले मासिक धर्म का आना।

जिन महिलाओं में १२ साल की उम्र से पहले ही मासिक धर्म आने की शुरुवात हो जाती है। उन महिलाओं में स्तन कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

पहले किसी को स्तन कैंसर हुआ हो।

यदि किसी महिला को पहले से स्तन कैंसर हो चूका है चाहे वह अन्य कोशिकाओं या ऊतकों तक न फैला हो उन महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना अधिक होती है।

जनरेटिक

यदि किसी महिला के रिश्तेदार या करीबी को स्तन का कैंसर है तो उस महिला को स्तन (brest) का कैंसर हो सकता है। परन्तु परिवार में यदि किसी दो व्यक्तियों को ब्रेस्ट कैंसर है तो ऐसा नहीं है की उनके जींस (jeans) सामान है| इसलिए इनको यह कैंसर हुआ हो, क्योकि कैंसर एक आम समस्या हो गई है। एक ऐसी बीमारी होती है जो किसी को भी हो सकती है।

स्तन पर गाठ होना

यदि किसी महिला के स्तन पर ऑपरेशन के बाद भी कैंसर रहित गाठ रह चुकी है तो ऐसी महिला को दुबारा कैंसर होने की संभावना होती है।

देरी से गर्भवती या गर्भवती न हो पाना

जो महिलाए ३०-३५ साल के बाद गर्भवती होती है या गर्भ का धारण नहीं कर पाती है। ऐसे महिलाओं को स्तन कैंसर होने की संभावना होती है।

शारीरिक रूप से सक्रीय न हो पाना

जो महिलाए शारीरिक रूप से सक्रीय नहीं हो पाती है उन महिलायों को ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ता है।

मोटापा अधिक होना

मोटापा यह बहुत ही गंभीर समस्या है और इसके द्वारा कई बीमारिया होती है इनमे से ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसी बीमारी होती है, जिन महिलाओं का वजन अधिक होता है उसे ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा रहता है।

गर्भ-निरोधक दवाई का सेवन

जो महिलाए गर्भ-निरोधक दवाई का सेवन अधिक मात्रा में करते है उनको स्तन कैंसर होने की संभावना होती है।

शराब और धूम्रपान करना

जो महिलाए शराब और धूम्रपान का अत्यधिक मात्रा में सेवन करते है उन महिलाओं में स्तन कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।

ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) से बचाव (Breast Cancer Prevention in Hindi)

बदलती दिनचर्या और लाइफ स्टाइल में बदलाव के कारण भी स्तन कैंसर से बचा जा सकता है। निम्नलिखित कुछ ऐसे गन है जिनका पालन करके  स्तन कैंसर से बचा जा सकता है।

स्तनपान:- जो महिलाए स्तन पान करवा रही है उनको अन्य महिलाओं की तुलना में स्तन कैंसर होने की क्षमता कम होती है।

व्यायाम:-जो महिलाए नियमित रूप से व्यायाम करती है उन महिलाओं को स्तन या ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा कम रहता है।

शराब या धूम्रपान:-जो महिलाए अधिक मात्रा में शराब या धूम्रपान का अधिक सेवन करते है। उन महिलाओं में ब्रेस्ट केसर होने का खतरा बढ़ता है।

डाइट:– संतुलित और स्वस्थ आहार का सेवन करने से स्तन कैंसर को टाला जा सकता है।

मेनपॉज के बाद हार्मोन थेरेपी:- हार्मोन थेरेपी स्तन कैंसर होने के खतरे को कम करने का काम करती है। इसलिए इस थेरेपी को उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य ले और उसके लाभ और नुकसान के बारे में अवश्य जानकारी ले।

ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) का इलाज (Breast Cancer Treatment in Hindi)

कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है की कैंसर कौन से स्टेज पर है, यह कितना फैला है। ट्यूमर का आकार कितना बड़ा है। इन सब बातो का पता चलने के बाद ही डॉक्टर से संपर्क करके डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर का इलाज किया जाता है। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए निम्नलिखित उपायों को अपनाना चाहिए।

सर्जरी

ब्रेस्ट कैंसर का सबसे आसान तरीका है सर्जरी करना। स्तन कैंसर को हटाने के लिए कई सारे सर्जरी का उपयोग किया जाता है।

लम्पेक्टॉमी (lumpectomy):– इस प्रकार की सर्जरी में कैंसरग्रस्त भाग को निकाल दिया जाता है। उसके बाद अन्य ऊतकों को अपने जगह पर ही रहने देते है।

मास्टेक्टॉमी (mastectomy):– इस सर्जरी में जिस स्तन में कैंसर हुआ है, उस स्तन को निकाल दिया जाता है। यदि डबल मास्टेक्टॉमी हुआ है, तो दोनों स्तनों को निकाल दिया जाता है।

सेंटिनल नोड बायोप्सी (sentinel node biopsy ):– इस सर्जरी में लिम्फ नोड्स (limfonod) को निकाल दिया जाता है। बाद में इसका टेस्ट किया जाता है यदि यह कैंसरग्रस्त है तो इसको ठीक करने के लिए और अधिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।

हार्मोन थेरेपी (Hormone Therapy)

यदि ब्रेस्ट कैंसर पर आप के हार्मोन का प्रभाव पड़ रहा है तो इसको रोकने के लिए डॉक्टर कुछ चिकित्सक इलाज शुरू कर सकते है। जिससे कैंसर के विकास को रोकने में मदत मिलती है। महिलाओं में पाए जाने वाले हार्मोन एस्ट्रोजन  और प्रोजेस्टेरोन ऐसे होते है, जो ब्रेस्ट कैंसर के ट्यूमर को बढ़ने का काम करते है। इन हार्मोन्स के उत्पादन को रोकने के लिए डॉक्टर कुछ दवाइया देते है। जिससे कैंसर के विकास को कम किया जाता है।

विकिरण चिकित्सा (Radiation Therapy)

कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए एक्स-रे (Ex-Ray) की किरणों का उपयोग किया जाता है। ज्यादा तर कैंसर के उपचार के लिए बाहरी मशीनों के विकिरण का उपयोग किया जाता है।

कीमियो थेरेपी (kemio therapy) के माध्यम से भी कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया जा सकता है। इसमें कोशिकाओं के माध्यम से इंजेक्शन से भी दवा छोड़ी जाती है। कुछ अन्य परिस्थितियों में सेक्टर सर्जरी के पहले कीमियो थेरपी का उपयोग किया जाता है। इसको करने का उदेश्य यह होता है की कैंसर के ट्यूमर को सिकुड़ा जाए और सर्जरी करते समय ज्यादा चीरा फाड़ी न हो।

ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) में क्या खाना चाहिए। (What to eat During Breast Cancer in Hindi)

ब्रेस्ट कैंसर में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं यह निम्नलिखित है।

  • भोजन को दिन में थोड़ा -थोड़ा करके खाए। जिससे उलटी या मचलन होने से बचा जाए।
  • इस बीमारी में ज्यादा से ज्याद प्रोटीन युक्त भोजन जैसे:- मटन, मछली,अंडे और बिन्स आदि पदार्थो का सेवन करना चाहिए। जिससे कोशिकाओं की मरम्मत होने में आसानी होती है और रोग प्रतिरोग क्षमता भी अच्छी होती है।
  • जितना हो सके फल और सब्जियों का सेवन अधिक करे क्योकि उससे हमें एंटी ऑक्सीडेंट मिलते रहते है।
  • मीठा जितना हो सके कम खाए।
  • दिन के समय पानी का सेवन अधिक मात्रा में करे। आपको दिन में लगभग २-३ लीटर पानी पीना चाहिए।

दवाए (Medications)

ब्रेस्ट कैंसर में किसी भी प्रकार की दवाई का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य ले। यदि आप ऐसा नहीं करते है, तो यह आप के लिए खतरनाक भी साबित हो सकता है। कुछ दवाइया ऐसी होती है जो कैंसर की कोशिकाओं के म्यूटेशन (mutation) पर सीधा हमला करता है। इसमें हरसेप्टिन से HER2 के प्रोटीन को काम किया जा सकता है। HER2 कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने में अहम् भूमिका निभाता है। इसलिए प्रोटीन को बनाने से रोकने के लिए कैंसर की कोशिकाओं को रोका जाता है।

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