छाती (सीने) में दर्द, इसके लक्षण, कारण और उपचार | Chest Pain Symptoms, Causes Treatment in Hindi

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छाती में या सीने में दर्द (Chest Pain in Hindi) एक चुभन जैसा होता है। यह दर्द एक तरह का उभार होता है। छाती के दर्द में कभी-भी दर्द और जलन महसूस होता है, और कुछ मामलो में छाती का दर्द गर्दन से होते हुए सिर तक पहुंच जाता है। जबड़ो में भी इसका दर्द होता है।

आमतौर पर छाती का दर्द हृदय से जुड़ा हुआ रहता है, और यह दिल से भी जुड़ा हुआ रहता है। कई ऐसी समस्याए होती है, जो सीने के दर्द का कारन भी बन सकता है। सामान्यतौर पर छाती की बीमारी हृदय और फेफड़ो से सबंधित होती है| छाती के दर्द का सही कारन पता लगाना भी आसान नहीं होता है । इसलिए यदि आप के छाती में थोड़ा सा भी दर्द हो या जलन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर इसका इलाज करवा लेना चाहिए।

छाती (सीने) के दर्द के लक्षण (Chest Pain Symptoms in Hindi)

सीने में दर्द (Chest Pain in Hindi) के लिए हृदय से सबंधित रोगो को जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन जो लोग हृदय से सबंधित रोगो से ग्रसित होते है। उन लोगो के अनुसार उनके छाती में जलन और दर्द महसूस होता है। जो निम्नलिखित लक्षणों के साथ जुड़ा हुआ रहता है।

  • छाती में जलन होना।
  • सीने में खिचाव महसूस होना।
  • छाती में दबा या भरा हुआ महसूस।
  • तेज चुभने वाले दर्द के कारण गर्दन से लेकर जबड़ो तक दर्द पहुँचता है।
  • मचलाहट होना।
  • उलटी होना।
  • घबराहट होना।
  • पसीना आना।
  • सांस लेने में परेशानी।
  • कमजोरी या चक्कर आना।
  • अचानक तेज दर्द होना।
  • इसके अलावा अन्य छाती के दर्द के लक्षण होते है, जो निम्नलिखित होते है।
  • मुँह में से खट्टे डकार आना।
  • खाना खाते समय खाना पेट से मुँह तक आना।
  • खाना निगलते समय कठनाईया आना।
  • सास या खासी आने पर दर्द बढ़ जाना।
  • छाती दबाने से दर्द अचानक बढ़ जाना।

छाती (सीने) में दर्द के कारण (Chest Pain Causes in Hindi)

आमतौर पर ऐसा माना जाता है, की सीने के दर्द (Chest Pain in Hindi) के कारण हृदय से सबंधित बीमारिया होती है। परन्तु यह पूरी तरह से सही नहीं है। लेकिन यह कभी-कभी निम्न के लक्षण भी होता है।

दिल का दौरा (Heart attack):- हृदय के किसी भी भाग में अचानक खून का रुक जाना या वह तक रक्त नहीं पहुंच पाने के कारण भी दिल के दौरे की बीमारी होती है।

एंजाइना (angina):-हृदय की माशपेशियों तक रक्त का नहीं पहुंच पाना।

इन दोनों स्थितियों के बिच का अंतर यह है, की एंजाइम के कारण शरीर में होने वाले दर्द की शुरुवात मचलाहट, उलटी और मानसिक तनाव से शुरू होती है और बहुत जल्दी ठीक हो जाती है। दिल के दौरे के लक्षण १० मिनिट से अधिक समय तक रहते है, और इनके कारण अधिक पसीना आना,मचलाहट, उलटी और घबराहट आदि समस्याए होती है।

छाती में दर्द के सामान्य कारण:-

अधिकतर छाती के दर्द हृदय से सबंधित नहीं होते है। और इनका शरीर पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। यह जीवन के लिए कोई हानिकारक संकेत नहीं होते है। लेकिन छाती के दर्द को सुनिच्चित करने के लिए डॉक्टर से इलाज करवाए और उनसे सलाह अवश्य ले।

छाती में दर्द के कुछ सामान्य कारण निम्नलिखित होते है।

फेफड़ो की समस्या:– छाती में तेज दर्द निमोनिया और प्लारीसी के समस्याओं के कारण होता है सांस अंदर बाहर लेने से इनमे ज्यादा दर्द होता है। इनकी स्थिति खासी और सांस फूलने जैसे अन्य लक्षणों से जुडी हुई रहती है।

सीने की माशपेशियों में खिंचाव:– छाती के मांसपेशियों में खिंचाव के कारण छाती में तेज दर्द होता है। परन्तु आराम करने से माशपेशियों का दर्द कम हो जाता है।

गार्ड या गेस्ट्रो-इसोफेगल-रिफलक्स रोग:– यह छाती दर्द की एक आम स्थिति होती है इसमें अम्लीय पदार्थ पेट से वापस मुँह की तरफ गैस नई से आता है। जिसके कारण मुँह में ख़राब स्वाद और सीने में जलन महसूस होती है।

चिंता के कारण:- चिंता के कारण पसीना आना, सास फूलना,चक्कर आना और दिल की धड़कन अचानक तेज हो जाना आदि लक्षण होते है।

छाती (सीने) के दर्द से बचाव (Chest Pain Precaution in Hindi)

छाती के दर्द (Chest Pain in Hindi) के रोकथाम के लिए कई तरीको से रोका जा सकता है। इनमे हृदय सबंधी और गैर-हृदय सबंधी दर्द के प्रकार सम्मिलित रहते है।

जो लोग धूम्रपान का सेवन करते है उनको हृदय सबंधी छाती के दर्द की समस्या होती है| यदि वह धूम्रपान का सेवन करना छोड़ देते है, तो वह सीने में होने वाले दर्द से बच सकते है। स्वस्थ जीवन के लिए फाइबर और कम वसा युक्त खाद्य पदार्थ खाना चाहिए और नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। जिन लोगो को हृदय से सबंधित रोग होने का खतरा रहता है, उन लोगो को डॉक्टर से संपर्क करके उनके द्वारा दिए गए दवाई का सेवन करना चाहिए। एथेरोस्कलेरोसिस  हृदय से सबंधित छाती दर्द का एक आम कारण होता है। इसका इलाज करवा के सीने के दर्द को कम किया जा सकता है। इसके अलावा और भी ऐसे कारण होते है जिनके कारण सीने में दर्द होता है। डिप्रेशन के कारण भी सीने में जलन और तेज दर्द होता है।

छाती (सीने) के दर्द का इलाज (Chest pain Treatment in Hindi)

सीने के दर्द को निम्नलिखित कारणों के आधार उसके उपचार अलग-अलग होते है।

1. दवाए

एसिड को दबाने वाली दवाए (Acid-Suppressing Medications):– यदि सीने का दर्द पेट के एसिड के कारण हो रहा है, जो ग्रासनली से खाना मुँह तक वापस आता है। ऐसे में डॉक्टर पेट में होने वाले एसिड को कम करने के लिए दवाए देते है।

धमनी को आराम देने वाली दवाए (Artery Relaxers):– नाइट्रोग्लिसरीन एक ऐसी दवाई होती है। जिसको जीभ के निचे रखा जाता है, जो धमनियों को शिथिल करने का काम करती है। जिसके कारण संकुचित मार्गो से रक्त आसानीसे बहने लगता है।

एस्पिरिन (Aspirin):– यदि डॉक्टर को संदेह है की सीने का दर्द हृदय से सबंधित है तो वह एस्पिरिन दवाई लेने की सलाह देते है।

खून को पतला करने वाली दवाए (Blood Thinners):– यदि हृदय या फेफड़ो तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में खून जम जाता है, तो डॉक्टर खून को पतला करने वाली दवाइयों का सेवन करने की सलाह देते है।

2. सर्जरी और अन्य प्रक्रियाए

सीने के दर्द के खतरनाक इलाज के लिए निम्नलिखित प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है।

फेफड़ो में संक्रमण (Lung Reinflation):– यदि आप के फेफड़े किसी कारणवश दबे (संकुचित) हुए हो तो, डॉक्टर उसमे नली डालकर फुलाने का कम करता है।

बाईपास सर्जरी (Bypass Surgery):– बाईपास सर्जरी के दौरान डॉक्टर मरीज के शरीर में से किसी दूसरे भाग के रक्त वाहिकाओं को निकाल देता है, तथा उस रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध हुए धमनी के रूप दूसरे मार्ग पर निकाल देता है।

स्टेट प्लेसमेंट और बलून्स (Stent Placement and Balloons):– यदि किसी के सीने में हृदय तक रक्त पहुचानी वाली धमनी के कारण दर्द होता है तो, डॉक्टर उस धमनी में एक पतली ट्यूब को दूसरी धमनी के द्वारा अंदर डालते है जिसके मुँह पर छोटा बलून्स होता है। जो अवरुद्ध हुई धमनी तक पहुंचाने पर उसको फुलाया जाता है। जिसके कारण धमनी में रक्त का सर्कुलेशन ठीक हो जाता है। कुछ मामलो में वाहिकाओं को खुला रखने के लिए ट्यूब में एक छोटा सा तार डाला जाता है, वाहिकाओं को खुला रखने में मदत करता है।

छाती (सीने) के दर्द के परिक्षण (Chest Pain Diagnosis in Hindi)

यदि आप को सीने में जलन या दर्द हो रहा है या आप को ऐसा लगे की दिल का दौरा पड़ सकता है, तो ऐसे में सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, और उनसे परामर्श कर लेना चाहिए। यदि आप को पहली बार दर्द हो रहा हो तो और कुछ क्षणों से अधिक रहता है।

रक्त परीक्षण (Blood Test):– रक्त का परीक्षण करके एंजाइम के स्टार को मापने का काम किया जाता है।

इलेक्ट्रोडायाग्राम (Electrocardiogram):– यह आप के हृदय के विद्तयु गतिविधि को नापने का काम किया जाता है।

इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram):-इस प्रक्रिया में ध्वनि तरंगो के माध्यम से दिल की तस्वीरों को रिकॉर्ड किया जाता है।

एक्स-रे (Ex-Ray):– इस प्रक्रिया में फेफड़े, हृदय और रक्त की जांच करने के लिए छाती का एक्स -रे किया जाता है जिसके कारण छाती के आतंरिक भाग का पता लगाया जा सकता है।

एमआरआई (MRI):- इसके माध्यम से हृदय और धमनियों के मध्य होने वाली क्षति की जांच की जाती है।

एंजियोग्रास (Angiogram):-इस परिक्षण के माध्यम से रक्त की धमनियों में रूकावट के कारण का पता लगया जाता है।

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