गाउट क्या है? इसके लक्षण, कारण और घरेलु उपचार | Gout Symptoms, Causes, Treatment in Hindi

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Gout in Hindi गाउट या जिसे वातरक्त रोग भी कहा जाता है। यह मनुष्य में यूरिक एसिड के बढ़ने के कारण होती है, आमतौर पर यह बीमारी आप के पैरो की उंगलियों को प्रभावित करते है। यदि आप गाउट की बीमारी से ग्रसित हो तो आप के हाथ -पैरो में दर्द ,सूजन और अचानक दर्द महसूस होता है।अचानक दर्द महसूस होना यह गाउट का मुख्य लक्षण होता है। आइए आज हम आप को इस पोस्ट के माध्यम से गाउट क्या है,गाउट के लक्षण और इसके घरेलु उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी बताएंगे।

गाउट (वातरक्त ) क्या है? (Gout in Hindi)

गाउट की बीमारी में अचानक जोड़ो में दर्द होने लगता है। गंभीर गाउट के कारण कभी-कभी हाथ -पैरो में गाठ जमने लगती है। गाउट की बीमारी अधिकतर पुरुषो में अधिक होने की संभावना रहती है और रोजोनिवृति के बाद महिलाओं में भी यह समस्या पाई जाती है। गाउट को गठिया का जटिल रूप  भी कहा जाता है। इस बीमारी में जोड़ो में दर्द,सूजन और गरमाहट महसूस होने लगती है। गाउट के कारण प्रभावित वाले क्षेत्र के ऊतकों में दर्द होने लगता है। इसे पॉलीआर्टिकुलर गाउट के रूप में भी जाना जाता है। गाउट का इलाज आसानी से कर सकते है। और इसे दुबारा होने के खतरे को भी कम किया जा सकता है।

गाउट (वातरक्त) के लक्षण  (Gout Symptoms in Hindi)

गाउट या वातरक्त रोग के लक्षण आमतौर पर रत के समय में महसूस होते है। रत में सोते समय अचानक पैरो में सूजन और उंगलियों में दर्द होने लगता है। इसके अलावा निम्नलिखित कुछ ऐसे लक्षण होते है जो गाउट के रोग को प्रदर्शित करता है।

  • जोड़ो में दर्द होना
  • एक या एक से अधिक जोड़ो में दर्द होना।
  • प्रभावित जोड़ो में सूजन या गरमाहट महसूस होना।
  • अचानक जोड़ो में अकड़न हो जाना।
  • एनीमिया की समस्या होना। (अधिक जानकारी:-एनीमिया क्या है? लक्षण, कारण और उपचार)
  • बुखार आना।
  • हाथ -पैरो में सूजन आना।
  • गाउट से प्रभावित जगह पर लाली आना।
  • यदि समय पर इलाज न हुआ तो इसके लक्षण बढ़ते जाते है।
  • शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने से इसके क्रिस्टल मूत्र पथ में एकत्रित हो जाते है। जिसके कारण किडनी स्टोन होने की संभावना अधिक होती है।
  • जिन लोगो को गाउट की बीमारी हुई है। उन लोगो को एक साल के अंदर ही अटैक होने का खतरा रहता है।
  • गाउट की बीमारी गंभीर होने से रीढ़ की हड्डी में दर्द,कंधो या जोड़ो में दर्द होना।

अधिकतर गाउट के लक्षण पैरो में दिखाई देते है, परन्तु इसके अलावा अन्य जोड़ भी प्रभावित हो सकते है।

  • जोड़ो में ।
  • घुटने में।
  • कोहनियो में।
  • टहने में।
  • कलाई में।
  • उंगलियों में।

गाउट (वातरक्त) के कारण (Gout Causes in Hindi)

गाउट या वातरक्त की समस्या तब होती है जब आप के जोड़ो में युरेक क्रिस्टल जमा होने लगते है। इन्ही युरेक क्रिस्टल के प्रभाव के कारण जोड़ो (गाठ) में सूजन और दर्द होना शुरू हो जाता है। युरेक क्रिस्टल का प्रभाव तब बढ़ता है जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। सामान्यतः शरीर में पाए जाने वाले प्यूरिन नमक पदार्थ के टूटने या अपघटित होने के कारण यूरिक एसिड उत्पन्न होता है। जिसके कारण हमें गाउट या वातरक्त की समस्या होने लगती है।

इसके अलावा निम्नलिखित कारण की वजह से गाउट की समस्या हो सकती है।

  • मोटापा अधिक होना
  • खून में यूरिक एसिड (uric acid) की अधिक मात्रा और ग्रंथियों में यूरिक एसिड क्रिस्टल के रूप में एकत्रित होने से गाउट की समस्या पैदा होती है। शरीर में यूरिक एसिड के क्रिस्टल के जमाव से प्रभावित वाले क्षेत्र में दर्द, सूजन लाली और गर्मी आदि महसूस होती है।
  • खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने से हाइपरूरिसिमिया जिसके कारण मोटापा,मूत्र की गोलिया और क्रोनिक की कमी से किडनी की बीमारी होने का खतरा होता है।
  • कुछ खाद्य पदार्थ जैसे मांस, मछली और समुद्री भोजन में प्यूरिन एसिड की मात्रा अधिक होने से गाउट की बीमारी होने की संभावना होती है।
  • मादक पेय पदार्थ जैसे शराब, बियर और फल इनमे अधिक मात्रा में चीनी उपस्थित होती है। जिनके कारण गाउट की बीमारी होने का खतरा होता है।
  • गुर्दे की कार्य करने की क्षमता में कमी आना।
  • सर्जरी के कारण
  • गंभीर चोट लगने के कारण।

गाउट (वातरक्त) रोग के निदान (Daignose of Gout in Hindi)

गाउट के रोग को ठीक करने के लिए डॉक्टर द्वारा निम्नलिखित जांच शामिल की जा सकती है।

रक्त परिक्षण (Blood Test):– रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा को नापने के लिए डॉक्टर रक्त के परिक्षण की सलाह देते है। परन्तु यूरिक एसिड के परिक्षण के आधार पर गाउट रोग के बारे में पता लगाया नहीं जा सकता है। क्योकि खून में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक पाई जा सकती है।

जोड़ो में तरल पदार्थ का परिक्षण (Joint Fluid Test):– डॉक्टर के द्वारा प्रभावित अंगो से तरल पदार्थ निकालने के लिए सुई का उपयोग किया जाता है। इस तरल पदार्थ को सुई से निकालने के बाद सुष्मदर्शी जाँच कर यूरेट क्रिस्टल का पता लगाया जाता है। इसके पच्छात तरल पदार्थ और सूजन को हटा दिया जाता है।

अल्ट्रासाउंड ट्रीटमेंट (Ultrasound Treatment):– अल्ट्रासाउंड के परिक्षण से जोड़ो या पेशाब में यूरिक एसिड में क्रिस्टल का पता लगाया जा सकता है। अमेरिका और यूरोप में अल्ट्रासाउंड तकनीक का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।

एक्स-रे (Ex-Ray):-एक्स-रे इमेजिंग की प्रक्रिया से गाउट के रोग के परिक्षण का अच्छे से इलाज किया जाता है।

सी.टी.स्कैन (CT Scan):-इस प्रकार की स्कैनिंग का उपयोग प्रभावित हुए क्षेत्र में यूरेट क्रिस्टल एसिड या सूजन का पता लगाना चाहिए । इस परिक्षण को करने से खर्च अधिक लकता है। इसलिए इसका व्यापक रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता ।

गाउट का इलाज (Gout Treatment in Hindi)

गाउट के इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा दवाइयों का सेवन करने के लिए कहा जाता है । कौन सी दवाई को कब लेना यह आप की गाउट की समस्या पर निर्भर करता है।

गाउट के इलाज के लिए निम्नलिखित दवाइयों का सेवन किया जाता है।

एंटी इम्फ़ालामेंट्री दवाए

  • आइबुप्रोफेन   (ibuprofen)
  • सेलीकोसिब   (celecoxib)
  • नेप्रोक्सिन सोडियम (Naproksen Sodiyum)

गाउट रोग के शुरुवाती समय में डॉक्टर आप को इन दवाई का सेवन करने के लिए कह सकते है, जिसके कारण गाउट का प्रभाव जल्दी से कम हो जाए। इसके बाद इन दवाइयों की खुराक धीरे-धीरे कम की जा सकती है।

  • कॉर्टिकोस्टेरॉइड (corticosteroids):– कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा प्रिडनाइसों एक तरह की दवा होती है। जो गाउट की सूजन और दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। इसको आप गोली या इंजेक्शन के रूप में ले सकते हो|

कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा उन लोगो के लिए आरक्षित की जाती है जो एनएसआईडी और कोलचिसाइन नहीं ले सकते है। इस टेबलेट के साइड इफ़ेक्ट भी होते है। सोच में बदलाव, हाई बी पी और शुगर में बढ़ोतरी होती हाई।

  • कोलचिसाइन (Colchicine):– यह एक दर्द निवारक गोली होती है। जो गाउट के दर्द के प्रभाव को कम करने का काम करती है। इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से मचलाहट,उलटी और दस्त होने का खतरा होता है।
  • प्रोबेनेसिड (probenecid):- इस दवा का उपयोग गुर्दे और मूत्र में यूरिक एसिड की मात्रा को ख़त्म करने में मदत करती है।
  • Allopurinol:- इस दवा का उपयोग शरीर में एकत्रित यूरिक एसिड की मात्रा को कम करती है, और साथ ही साथ यूरिक एसिड को मात्रा को भी कम करता है।

गाउट (वातरक्त) रोग के बचाव (Gout Precaution in Hindi)

गाउट के रोगो से दवाइयों के साथ-साथ कुछ अन्य तरीको से भी बचा जा सकता है ।

  • रोजाना नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए
  • दिन में कम से कम ३-४ लीटर पानी का सेवन करना चाहिए।
  • मीठे पदार्थ का अधिक सेवन करने से बचे।
  • शराब या किसी भी प्रकार की नशीले पदार्थ का सेवन न करे।
  • मांस,मछली और डेयरी प्रोडक्ट आदि का सेवन करने से बचे।
  • शरीर का वजन कम होने से गठिया की बीमारी होने का खतरा कम रहता है।

गाउट (वातरक्त) रोग के लिए घरेलु उपचार (Gout Home Remedies in Hindi)

गाउट की बीमारी का इलाज दवाई के साथ-साथ आयुर्वेदिक रूप से भी किया जा सकता है। यह दर्द से सबंधित बीमारी होती है इसको घरेलु उपचार के द्वारा भी ठीक किया जा सकता है।

सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar in Hindi)

सेब के सिरके का उपयोग एसिडिटी और सिर दर्द के इलाज के लिए किया जाता है। गाउट और गठिया के इलाज में भी मदत करता है। एप्पल साइडर विनेगर का उपयोग यूरिक एसिड में होने वाले दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। यह बालो और स्किन से काले धब्बे हटाने में भी फायदेमंद होता है। एक ग्लास पानी में एक चम्मच एप्पल साइडर विनेगर पिने से दर्द और एसिडिटी की समस्या को दूर किया जाता है|

अदरक की जड़ (Ginger Root)

अदरक की जड़ या टुकड़े का उपयोग गाउट में होने वाले दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। आप अदरक की जड़ या टुकड़े का उपयोग मसाले में खाने के साथ कर सकते हो और चाय में भी अदरक के टुकड़ो का उपयोग किया जाता है, जिसके कारण सर्दी और दर्द में राहत मिलती है|

बैंकिंग सोडा (Baking Soda)

बैंकिंग सोडे का उपयोग करके यूरिक एसिड की मात्रा और दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग निम्नलिखित तरीको से किया जा सकता है।

  • एक गिलास पानी में आधा चम्मच बैंकिंग सोडा मिलाए।
  • इसे दिन में ३-४ बार पी सकते है। अधिक मात्रा में पिने से इसके नुकसान भी होते है।

निम्बू का रस (Lemon juice)

निम्बू के रस का सेवन करने से बहुत सी बीमारियों से निजाद मिल सकती है। निम्बू के रस के साथ आधा चम्मच बैंकिंग सोडा मिलाने से यूरिक एसिड की मात्रा को कम किया जा सकता है। निम्बू में उपस्थित विटामिन सी गाउट की बीमारी और ऊतकों को ठीक करने का कम करते है।

चेरी (Cherries in Hindi)

चेरी में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते है। जो गठिया के इलाज में बहुत मदतगार होते है। चेरी में एंथोसाइनिन होते है जो गठिया के इलाज के लिए फायदेमंद होते है।

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