खाने की नली का कैंसर के कारण, लक्षण और उपाय (esophageal cancer in hindi)

आहार नली कैंसर के लक्षण | आहार नली कैंसर

हम सब में से किसी को भी नही पता होता कि कब कौन सी बीमारी हमे अपनी चपेट में ले ले। पहले के समय मे कैंसर जैसी बीमारी को बहुत ज्यादा बढ़ी बीमारी समझा जाता था परन्तु आज के इस दौर में कैंसर की बीमारी बहुत लोगो को अपना शिकार बना रही हैं कैंसर की बीमारी भी कई प्रकार की हो सकती है। चलिये आज हम खाने की नली के कैंसर के बारे में जानते है।

खाने की नली का कैंसर (throat cancer in hindi)

खाने की नली का कैंसर जिसे एसोफैगल कैंसर भी कहा जाता है। यह कैंसर हमारे शरीर मे मौजूद एसोफेगस नली में होता है। यह नली एक प्रकार से एक लंबी और खोखली ट्यूब होती है जो गले से पेट तक होती है और इसी नली को खाने की नली भी कहते है। हम जो भी भोजन ग्रहण करते है एसोफेगस नली उस भोजन को पेट मे पाचन के लिए पहुँचाती है। अक्सर यह भी देखा गया है कि खाने की नली का कैंसर महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा होता है।

खाने की नली का कैंसर के कारण (throat cancer causes in hindi)

जब एसोफेगस नली की कोशिकाओं में मौजूद डीएनए में गड़बड़ी होती है तब खाने की नली का कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। डीएनए में गड़बड़ी होने के कारण कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर हो जाती है और बढ़ने के साथ साथ विभाजित होने लगती है। विभाजित होने के बाद यह कोशिकाएं इकट्ठी होने लगती है और शरीर मे ट्यूमर बनाने लगती है।

आइये खाने की नली में कैंसर के कारणों के बारे में जानते है।

  • शराब पीने की लत- अगर किसी व्यक्ति को शराब पीने की लत है तो उसे खाने की नली का कैंसर होने का खतरा होता है।
  • एसिड रिफ्लक्स होना- अगर किसी को एसिड रिफ्लक्स की समस्या है तो उसे तुरंत ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि यह भी खाने की नली का कैंसर होने का एक कारण होती है।
  • बहुत गर्म तरल पदार्थ का सेवन- बहुत ज्यादा गर्म तरल पदार्थ का सेवन भी इस बीमारी का कारण बनता है। बहुत ज्यादा गर्म पानी पीने से भी खाने की नली का कैंसर होने का खतरा रहता है ।
  • धूम्रपान करना- धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को भी खाने की नली का कैंसर होने की प्रबल संभावनाएं होती है।
  • मोटापा- मोटापा तो वैसे भी कई बीमारियों को निमंत्रण देता है और मोटापा होने से खाने की नली का कैंसर होने का खतरा होता है।
  • फलों और सब्जियों का कम प्रयोग- फलों और सब्जियों का कम प्रयोग भी इस बीमारी के होने की वजह होता है।
  • रेडिएशन- अगर आपके सीने में या उपरी पेट मे रेडिएशन के द्वारा कोई उपचार हुआ है तो भी खाने का नली का कैंसर होने की आशंका है।

खाने के नली के कैंसर के लक्षण (throat cancer symptoms in hindi)

अगर किसी बीमारी के बारे मे हमे उसके शुरुआती चरणों मे पता चल जाये तो हम उसका सही से इलाज करा सकते है उसी तरह अगर खाने की नली का कैंसर के लक्षण हमे शुरू में ही पता चल जाये तो उस बीमारी को जानलेवा बनने से पहले ही रोका जा सकता है।

निगलने में परेशानी- अगर आप कुछ भी खाते है और आपको उसे निगलने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो हो सकता है कि आपकी खाने की नली में कोई समस्या हो। तो ऐसे में आपको डॉक्टर से मिलकर जांच करवानी चाहिए।
वजन घटना- अगर आपका वजन बिना किसी प्रयास के घट रहा है तो आपको इसकी जाँच करानी चाहिए क्योंकि यह भी खाने की नली का कैंसर के लक्षण होते है।
छाती में दर्द- छाती में दर्द होना भी इस बीमारी का लक्षण होता है। इसके अलावा छाती में दबाव या किसी तरह की जलन महसूस करना भी इस बीमारी का अंदेशा हो सकती है।
अपच की समस्या- कुछ भी खाने के बाद उसका ना पचना, अपच की समस्या लगातार बने रहना भी इस बीमारी का संकेत होती है।
गले मे परेशानी- लगातार गला बैठे रहना या खांसी रहना भी खाने की नली का कैंसर का लक्षण हो सकती है।

आहार नली कैंसर से बचाव (throat cancer prevention)

किसी भी बीमारी को फैलने से पहले उसकी रोकथाम करना ही बेहतर होता है आइए खाने की नली का कैंसर की रोकथाम के उपाय जानते है।

  • शराब का त्याग- इस जानलेवा बीमारी से बचने के लिए आपको आज ही शराब छोड़ देनी चाहिए।
  • धूम्रपान छोड़िये- अगर आप धूम्रपान करते है और कैंसर जैसे जानलेवा बीमारी से बचना चाहते है तो धूम्रपान बन्द कर दीजिये। अगर आप धूम्रपान नही छोड़ पा रहे है तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह लीजिए।
  • फलों और सब्जियों का प्रयोग- अपने भोजन में ताज़े फलों और सब्जियों को शामिल कीजिये।
  • वजन पर नियंत्रण रखें- जैसेकि हम पहले पढ़ चुके है कि मोटापा भी खाने की नली का कैंसर के कारण होते है तो इसलिए अपने वजन को नियंत्रण में रखे।
  • व्यायाम करिये- अपनी सेहत का ख्याल केवल आपको ही रखना होता है इसलिए अपनी दिनचर्या में व्यायाम की जगह बनाइये इससे आप इस ख़तरनाक बीमारी के ख़तरे को भी टाल पाएंगे।
  • नियमित स्वास्थ्य जाँच- नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य की जाँच करवाये।

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