गर्भावस्था में मूड में बदलाव होने के कारण, लक्षण और इलाज | Changes in Mood in Pregnancy Symptoms, Causes and Treatment in Hindi

mood swings in hindi

गर्भावस्था के दौरान शारीरिक बदलाव (mood swings during pregnancy in hindi) जैसे हार्मोन बदलाव, सिर दर्द, पेट दर्द, कमर दर्द, पेल्विक दर्द, चक्कर, उलटी आना आदि तो होता ही लेकिन इस दौरान मानसिक बदलाव भी आते है, महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स बदलाव के कारण मूड स्विंग की समय रहती है, आज की इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे की मूड स्विंग क्या होता है, इसके कारण और लक्षण क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है|

मूड स्विंग क्या है? (What is Mood Swing in Hindi)

गर्भावस्था (mood swings in hindi) में गर्भवती महिला को अपनी प्रेगनेंसी को लेकर काफी उत्साह होता है, जिसकी वजह से उनके मिजाज में बदलाव आने लगता है| यह बदलाव गर्भावस्था के पहली तिमाही से शुरू होता है और लगभग बच्चे के जन्म तक रहता है|

डॉक्टर का भी मानना है की गर्भावस्था के दौरान मूड स्विंग होना सामान्य बात है, और स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है, यह स्वस्थ गर्भावस्था का संकेत देता है| महिलाओं को गर्भ धारण करने में कई तरह के हार्मोन्स मदद करते है, और उनमे ही बदलाव होने के कारण मूड स्विंग होना शुरू होता है|

गर्भावस्था में मूड स्विंग होने के लक्षण (Mood Swing Symptoms in Pregnancy in Hindi)

  • बिना किसी कारण गुस्सा आ जाना|
  • नींद ना आना|
  • चिढ़चिढापन ज्यादा होना|
  • खाने में मन नहीं लगना|
  • बिना कारण चिंता करना|
  • किसी चीज का डर सताना|
  • ज्यादा सोचना|
  • किसी की बातों का ध्यान ना रख पाना|
  • कुछ कहते कहते भूल जाना|
  • बिना किसी वजह से किसी पर भी नाराज हो जाना|
  • बहुत लम्बे समय तक ध्यान केन्द्रित करने में असमर्थता|

गर्भावस्था में मूड बदलने (मूड स्विंग) के कारण (Due To Mood Swings in Pregnancy in Hindi)

  • कुछ महिलाओं को अपने शरीर में हो रहे बदलाव से परेशानी रहती है जिसकी वजह से उनका मूड बदलने लगता है, क्योंकि वे इस परेशानी को स्वीकार नहीं कर पाती|
  • गर्भावस्था के दौरान अपने पार्टनर की प्रतिक्रिया भी महिला का मूड बदलने के लिए जिम्मेदार है और गलत प्रतिक्रिया तनाव का कारण बन जाती है|
  • गर्भावस्था के दौरान थकान होना|
  • अधिक पेशाब आना|
  • अन्य किसी तरह की शारीरिक समस्या गर्भवती महिलाओं के मूड पर असर डालती है|
  • महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स बदलाव के कारण भी मूड स्विंग की समस्या रहती है, महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन में बदलाव के कारण ऐसा होता है|
  • कई महिलाओं को अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के बढ़ने की चिंता होती है जिसकी वजह से भी उनका मिजाज बदलता है|

गर्भावस्था में मूड स्विंग से बचने के लिए क्या करें  (What To Do To Avoid Mood Swings in Pregnancy in Hindi)

  • आराम करें

गर्भावस्था में जितना ज्यादा आराम करेगी उतना आपके शरीर और दिमाग के लिए अच्छा रहेगा, काम के बीच-बीच में थोडा ब्रेक लेती रहे| इससे आपको आराम भी मिलेगा और आपको ऊर्जा भी महसूस होगी|

  • योग और व्यायाम करें

अगर आप खुद को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखती है तो मानसिक रूप से आप अपने आप स्वस्थ बन जोगी. इसके लिए आप योग और व्यायाम का सहारा ले, सुबह जल्दी उठे और वाकिंग करें, तनाव को कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें|

  • दोस्तों के साथ वक्त बिताएं

गर्भावस्था के समय अपने दोस्तों से मिले और उनके साथ मस्ती करें. फ्रेंड्स के साथ घुमने चले जाए या फिल्म देखने चले जाए, उनके साथ वक्त बिताने से आप खुद अच्छा महसूस करेगी|

  • अपने हुनर या शौक को आजमायें

गर्भावस्था के दौरान पेंटिंग, डायरी लिखना, किताबे पढना, खाना बनाना आदि का शौक पाले. इससे आपका तनाव भी दूर होगा और आप कुछ सीख भी जाएगी, अच्छी किताबे पढने से आपमें सकारात्मक ऊर्जा बढ़ेगी|

  • अपने पार्टनर के साथ समय बिताएं

गर्भावस्था के दौरान जितना हो सके अपने पार्टनर के साथ समय बिताएं, दोनों माता-पिता के रूप में आगे की प्लानिंग करें, बच्चे का नाम चुने और बच्चे के चित्र को घर में लगायें|

इन बातों का भी ध्यान रखें

  • अच्छा और संतुलित आहार खाएं
  • नियमित शारीरिक कार्य करते रहे|
  • जीवनसाथी के साथ फिल्म देखने चले जाए|
  • योग क्लास ज्वाइन करें|
  • शरीर को आराम दें के लिए मालिश कराएँ, लेकिन जानकार की देखरेख में जिसे गर्भवती महिलाओं को मालिश करने का अनुभव हो|
  • अपनी नींद पूरी करें|
  • शरीर में होने वाले सामान्य बदलावों से घबराएँ नहीं|
  • ठंड के मौसम में गुनगुने पानी से और गर्मी के मौसम में ठंडे पानी से नहायें|  
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