न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर क्या होता है? लक्षण, कारण, उपचार और इलाज (Neuroendocrine Tumour in Hindi)

neuroendocrine tumor in hindi | neuroendocrine tumor symptoms

दोस्तों आज के समय में एक से बढ़कर एक बीमारी पैदा हो रही है । जिसमें Tumor और Cancer सबसे खतरनाक बीमारियां है। ट्यूमर आज के समय में तेजी से होने वाली बीमारी है। हमारी Body में ट्यूमर तब होता है जब अचानक Healthy cells बढ़ना शुरू कर देती है और एक पिंड का रूप धारण कर देती है इस पिंड को ही ट्यूमर कहते हैं। ट्यूमर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता हैं। सामान्यता ट्यूमर भी अकैंसरकारी और कैंसरकारी होते हैं।कैंसरकारी ट्यूमर का इलाज असंभव होता है लेकिन अगर इलाज जल्दी ही करा लिया जाए तो कैंसरकारी ट्यूमर को भी ठीक किया जा सकता है तथा अकैंसरकारी ट्यूमर को Benin (बिनाइन) नाम से भी जाना जाता है। अकैंसरकारी ट्यूमर को सर्जरी के द्वारा निकाला जा सकता है और यह शरीर में खतरा भी पैदा नहीं करते हैं।

What is a neuroendocrine tumor? Symptoms, causes and treatment 

तो दोस्तों चलिए जानते हैं कि न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर क्या होता है
सामान्यता इस ट्यूमर का निर्माण शरीर में हार्मोन पैदा करने वाले अंगों में होता है जैसे कि अंतःस्रावी ग्रंथियां या एंडोक्राइन। इससे ट्यूमर भी हार्मोन उत्पादन करना शुरू कर देते हैं और शरीर को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। कभी-कभी न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का निर्माण stomach, lungs और Intestines में भी हो जाता है क्योंकि वहां पर न्यूरोएंडोक्राइन कोशिकाएं उपस्थित होती है। जो शरीर में रक्त संचार सही करने और भोजन को digest करने का काम करती है।
न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर शरीर के Neuroendocrine system में हार्मोन बनाने वाली कोशिकाओं मैं शुरू होता है और यह हार्मोन उत्पादक Endocrine cells व तंत्रिका कोशिकाओं का समायोजन होता है। सामान्य तो इस ट्यूमर की गति बहुत ही धीमी होती है लेकिन जब इसके बारे में पता चलता है तो यह शरीर के अनेक हिस्सों तक पहुंच जाता है।

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर के लक्षण और कारण (neuroendocrine tumor symptoms in hindi)

1- आहारनली का न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (Throat cancer in hindi)
आज कल ज्यादातर लोग आहारनली के न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर से पीड़ित है। इसे Carcinoid के नाम से भी जाना जाता है।
यह ट्यूमर आहार नली में होने के साथ-साथ छोटी आंत और बड़ी आंत में भी यह ट्यूमर हो सकता है। इसके लक्षण निम्न है-

  • मल में रक्त आना
  • पेट दर्द और बेचैनी
  • डायरिया
  • खून की कमी से थकान होना
  • सीने में जलन होना
  • आंतों में रुकावट के कारण दर्द होना
  • अपाचन और सीने में दर्द होना

2- अग्नाशय का न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (Pancreatic neuroendocrine tumor)

यह अत्यधिक दुर्लभ ट्यूमर है जो कुछ ही लोगों में होता है। यह ट्यूमर अग्नाशय में ही विकसित होता है। इसकी ट्यूमर के विभिन्न प्रकार होते हैं।

  • वाइपोमस- यह शारीरिक क्रियाओं और पाचन क्रियाओं Vasoactive intestinal नामक Peptide का निर्माण करता है।
  • ग्लुकागोनोमस- यह रक्त में शर्करा के स्तर को बढ़ाते हैं।
  • सोमैटोस्टेटाइनोमा- यह पाचन क्रिया में Somatostatin नामक हार्मोन बनाता है।
  • इंसुलिनोमस- यह Insulin का निर्माण करते हैं।
  • गैस्ट्रिनोमस- Gastrin नामक हार्मोन भोजन को पचाने में सहायक होता है।

इनमें से कुछ ट्यूमर में इस प्रकार के ट्यूमर होते हैं जो अग्नाशय के बाहर विकसित होते हैं। गैस्ट्रिनोमस- गैस्ट्रिन नामक हार्मोन भोजन को पचाने में सहायक होता इसी तरह का एक ट्यूमर है। जो Kidney और Liver में पैदा होता है। इस ट्यूमर के लक्षण निम्न प्रकार है;

  • भूख कम लगना या भार में कमी होना
  • अचानक रक्तस्राव होना
  • उत्तेजना बढ़ना
  • गैस्ट्रिक अल्सर होना
  • लगातार ज्वर रहना और रात में पसीना आना
  • शरीर पर पीले चकते होना
  • इसमें रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती हैं जिसे Hyperglycemia कहते हैं।
  • अगर किसी रोगी को 20 से 25 दिन से लगातार दस्त हो रही है तो इसमें इस बीमारी की संभावना बढ़ जाती है।

3.फेफड़ों का न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (Neuroendocrine lung cancer)

इस तरह के ट्यूमर का निर्माण फेफड़ों में होता है और यह ट्यूमर अन्य के मुकाबले काफी खतरनाक होता है। फेफड़े के ट्यूमर अधिकतर वायु मार्ग में ही विकसित होते हैं।
इस ट्यूमर के लक्षण निम्न प्रकार है:

  •  लगातार खांसी आना
  • निमोनिया होना
  • कफ बने रहना
  • खांसी के साथ खून भी आना
  • अत्यधिक थकान रहना

4.एड्रीनल ग्रंथि का न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर या फीयोक्रोमोसाइटोमा (Pheochromocytoma in hindi)

यह ट्यूमर बहुत ही दुर्लभ होता है। इस ट्यूमर का निर्माण एड्रिनल ग्रंथि की Chromaffin cells में होता है। एड्रीनलीन हार्मोन का स्त्राव हमेशा तनाव और बचाव की स्थिति में होता है।फीओक्रोमोसाइटोमा का निर्माण हमेशा एड्रीनल मेड्यूला में होता है।इस तरह के ट्यूमर में एड्रीनेलिन और नॉरएड्रीनेलिन हार्मोनों का स्त्राव और बढ़ जाता है। जिससे blood pressure और Heart rate बढ़ जाती हैं।फीओक्रोमोसाइटोमा के लक्षण:

  • उच्च रक्तचाप होना
  • हृदय गति तेज होना
  • बुखार आना
  • उत्तेजना के दौरे पड़ना
  • वमन होना
  • सिर दर्द होना
  • पसीना आना
  • त्वचा चिपचिपी होना

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का उपचार और इलाज (Neuroendocrine tumor treatments)

जिस तरह से बीमारियां बढ़ रही है। उसी तरह से इनका इलाज करने की तकनीक भी विकसित हो रही हैं।न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर एक बहुत खतरनाक बीमारी है लेकिन सही समय रहते अगर इसका इलाज किया जाए तो इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। डॉक्टर न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का उपचार करने के लिए अलग- अलग Methods का इस्तेमाल करते हैं। कुछ ट्यूमर बहुत धीरे-धीरे बढ़ते हैं कुछ ट्यूमर तो सालों तक बिना बड़े ही रहते हैं। जब तक किसी ट्यूमर के लक्षण दिखाई नहीं दे तब तक उसका इलाज संभव नहीं है। न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का सबसे सरल उपाय सर्जरी है अगर सर्जरी ना हो तो अनेक उपचार भी है जो निम्न है;

1: रेडिएशन थिरैपी

रेडिएशन थेरेपी में उच्च ऊर्जा X rays का इस्तेमाल ट्यूमर कोशिकाओं को नष्ट करने में किया जाता है। सामान्यतः रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल उसी समय किया जाता है जब ट्यूमर ऐसी जगह पर हो जहां पर सर्जरी करना असंभव हो। आमतौर पर रेडिएशन थेरेपी को External-beam radiation thirapi भी कहा जाता हैं। रेडिएशन थेरेपी एक निश्चित संख्या में और निश्चित समय में ही दी जा सकती हैं।

2. कीमोथेरेपी

कीमोथेरेपी आजकल सबसे ज्यादा इस्तेमाल की देने वाली तकनीक है। कीमोथेरेपी में ट्यूमर कोशिकाओं को नष्ट कर ट्यूमर कोशिकाओं के विभाजन होने की क्षमता और कोशिकाओं के बढ़ने को रोका जाता है। इस थेरेपी के अंतर्गत Chemicals को रक्त प्रवाह के द्वारा ट्यूमर कोशिकाओं तक पहुंचाया जाता है। इसमें रोगी को एक निश्चित मात्रा में एक बार में एक औषधि या फिर गोली दी जाती है।

3. टार्गेटेड थिरैपी

टार्गेटेड थिरैपी यानी लक्षित उपचार विधि में उपचार का का लक्ष्य ट्यूमर से ग्रसित कोशिकाओं के आसपास के Tissue ,कोशिका और अंगों तक ट्यूमर के प्रभाव को नहीं पहुंचने देना होता है और ट्यूमर की Size में वृद्धि नहीं होने देना होता है। इस थेरेपी के उपचार से ट्यूमर की वृद्धि रुक जाती हैं और आसपास की कोशिकाएं तक ट्यूमर नहीं पहुंच पाता है।

वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के अनुसार न्यूरोएंडोक्राइन टयूमर का इलाज संभव है। यह ट्यूमर Normally 40 वर्षों के बाद ही दिखाई देता है इसलिए समय पर शरीर की जांच करवाने और निश्चित लक्षणों के अनुसार निश्चित थेरेपी कराने से इससे बचा जा सकता है।

शरीर में अगर न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर के लक्षण दिखाई दिखाई देते हैं तो समय रहते डॉक्टर से परामर्श लेकर इसका उपचार शुरू कर दें। समय रहते इलाज करने से इस ट्यूमर को ठीक किया जा सकता है। जिंदगी में ट्यूमर जैसी खतरनाक बीमारी से बचाव के लिए प्रतिवर्ष शारीरिक जांच जरूर कराएं।

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