गर्भवस्था में रक्तस्त्राव होने के कारण, लक्षण और घरेलु उपचार | Bleeding in pregnancy in Hindi

Bleeding in pregnancy

गर्भवस्था में महिलाओं में रक्तस्त्राव होना एक आम बात होती है, विशेष रूप से पहली तिमाही में महिलाओं को ब्लीडिंग होती है। यदि आप के साथ भी ऐसा हो रहा है,तो घबराने की कोई बात नहीं है। लेकिन यदि दूसरे और तीसरे तिमाही में योनि में से अधिक रक्तस्त्राव हो रहा है, तो यह बहुत ही गंभीर समस्या हो सकती है। गर्भवस्था के दौरान अधिक ब्लीडिंग होना खतरनाक भी साबित हो सकता है। इसलिए इस बात का ध्यान रहे की यदि गर्भवस्था के दौरान आप के योनि से अधिक ब्लीडिंग हो रही हो तो आप को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए,और साथ- साथ यह भी टेस्ट कर लेना चाहिए की रक्तस्त्राव के कारण आप के बच्चे पर कोई असर तो नहीं पड़ रहा है।

गर्भवस्था में रक्तस्त्राव (खून) बहने के लक्षण (Symptoms of Bleeding during Pregnancy in Hindi)

यदि आप रक्तस्त्राव के दौरान पेड्स और खून के धब्बो के प्रकार को याद रखे तो इससे रक्तस्त्राव के लक्षणों को पहचाने में आसानी होती है। इनके अलावा कुछ निम्नलिखित ऐसे लक्षण होते है जो रक्तस्त्राव या योनि से खून के बहने के संकेत देते है।

  • अधिक थकान होना।
  • प्यास अधिक लगना।
  • बार-बार चक्कर आना या बेहोश हो जाना।
  • अचानक हृदय की गति तेज हो जाना।
  • यदि आप लेटे हए हो और खड़े होने पर चक्कर आना।
  • हाथ -पेरो में कमजोरी महसूस करना।

उपरोक्त दिए गए लक्षण खून की कमी की वजह से होते है। यदि आप को ऊपर बताए गए लक्षणों में से किसी का भी अनुभव होता है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह और उनको होने वाली कमजोरी के बारे में बताए।

गर्भवस्था में ब्लीडिंग (खून) बहने के कारण (Pregnancy Bleeding Causes in Hindi)

गर्भवस्था के दौरान पहले तिमाही में ब्लीडिंग होने के बहुत से कारण हो सकते है। गर्भवस्था में लगभग २५%-३०% महिलाए ब्लीडिंग की समस्याओं से ग्रसित होती है, अधिक मात्रा में ब्लीडिंग होने पर गर्भपात होने का भी खतरा रहता है। यदि यह नहीं रुकता है तो ऐसी स्थिति में गर्भवस्था से बच्चा खिसक जाने का डर भी लगा रहता है। ऐसी अवस्था में आप को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यदि आप ऐसा नहीं करते हो तो यह आप के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

  • यदि किसी गर्भवती महिलाओं के योनि में इन्फेक्शन हुआ है तो उसके कारण भी योनि से रक्तस्त्राव होने का खतरा रहता है और यह गर्भवस्था के शुरवाती समय यानि १ से ३ महीने के अंतरगत होता है।
  • एक्टॉपिक प्रेग्नेंसी एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमे भ्रूण का विकास गर्भ में होने की बजाय फेलोपियन ट्यूब में होता है।
  • जब भ्रूण गर्भाशय में इम्प्लांट होता है तो स्पॉटिंग के तौर पर कम मात्रा में ब्लीडिंग होती है। यह रक्त स्त्राव मासिक धर्म के दौरान या उसके पहले होता है। परन्तु यह समझाना मुश्किल होता है की यह ब्लीडिंग स्पॉटिंग से हो रहा है या मासिक धर्म के कारण लेकिन इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती है। क्योकि यह आप को गर्भवती होने का संकेत देता है इसलिए इसको समझाना बहुत जरुरी होता है।
  • यदि आप का अंडाणु धब्बेदार है लेकिन यह अल्ट्रासाउंड में गर्भावस्था दिखता है। इस स्थिति में भ्रूण का विकास नहीं हो पाता है और वह अपने जगह पर ही सिमित होता है।
  • यदि किसी कारणवश गर्भवस्था में भ्रूण की मृत्यु हो जाती है तो उस अवस्था में भी रक्तस्त्राव अधिक मात्रा में होता है।
  • यदि आप गर्भवस्था के दौरान संभोग (सेक्स) करते है तो उसके बाद भी रक्तस्त्राव होता है जो एक सामान्य बात होती है।
  • किसी कारणवश गर्भवती महिलाओं का गर्भाशय फट जाता है या उसमे कोई घाव हो जाता है तो उसमे भी अधिक मात्रा में रक्तस्त्राव होता है।
  • पीरियड्स को कंट्रोल करने वाले हार्मोन्स में बदलाव के कारण भी प्रेग्नेंसी के शुरवाती समय में ब्लीडिंग होती है।

गर्भवस्था में आखरी दिनों में रक्तस्त्राव के कारण (Late pregnancy Bleeding Causes in Hindi)

गर्भवस्था के आखरी दिनों में गर्भनाल में कुछ समस्या होने के कारण भी रक्तस्त्राव होता है, और भी निम्नलिखित कुछ कारण ऐसे होते है जिनके कारण रक्तस्त्राव होता है।

  • गर्भनाल आप के बच्चे को गर्भ से जोड़ने का काम करती है। यह पूर्ण रूप से कोख से योनि तक का रास्ता होता है और उसमे फैली हुई रहती है, जिसके कारण रक्तस्त्राव होने लगता है।जब गर्भाशय की ग्रीवा प्रसव के लिए तैयार होती है उस दौरान गर्भनाल की रक्त वाहनीय खींचने के कारण फटने लगती है।
  • यदि गर्भनाल बच्चे के जन्म होने के पहले ही गर्भ की दीवार से अलग हो जाती है तो,रक्त प्लेसेंटा और गर्भाशय में इकढ्ढा हो जाता है, जो योनि से ब्लीडिंग के रूप में बाहर निकलने लगता है। इन सब का कारण होता है कोकीन ,तम्बाकू, हाई ब्लड प्रेशर और एक्सीडेंट आदि होते है।
  • यदि गर्भाशय फट जाता है तो बच्चा पेट की तरफ खिसक जाता है। यह अधिकतर प्रसव के दौरान या उससे पहले हो सकता है। यह बहुत ही गंभीर समस्या होती है। जिसके कारण योनि से अधिक मात्रा में रक्तस्त्राव होता है।
  • बच्चो की रक्तवाहिका प्लेसेंटा के अलवा झिल्ली भी होती है जो मॉ से बच्चे में रक्त संचरण करता है, और यदि की कारणवश यह रक्तवाहिका फट जाती है तो उस समय भी रक्तस्त्राव होता है।
  • योनि में घाव, चोट,सिस्ट और कैंसर आदि होने से भी रक्तस्त्राव होता है। परन्तु यह लगभग १०००० में से १-२ महिलाओं को ही होती है। यदि आप को इसी प्रकार की कोई समस्या है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर इसका इलाज करवा लेना चाहिए।

गर्भवस्था में रक्तस्त्राव (खून) रोकने के उपचार

  • गर्भपात होने के कारण रक्तस्त्राव अधिक मात्रा में होता है। जिससे डॉक्टर आप को आराम करने की सलाह देता है, और जबतक आप ठीक नहीं हो जाते हो तब तक संभोग न करने की सलाह भी देते है।
  • यदि अल्ट्रासाउंड परिक्षण में एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का पता चलता है तो आप को सर्जरी भी करवाना पड़ेगी। यह लेप्रोस्कोपी प्रक्रिया के दौरान की जाती है। इस प्रक्रिया में पेट में चीरा लगाकर फैलोपियन ट्यूब से एक्टोपिक प्रेग्नेंसी को निकाल दिया जाता है।
  • गर्भावस्था के आखरी दिनों में ब्लीडिंग अधिक होने पर आप को IV पदार्थ या खून चढ़ाया जाता है। जिससे आप की शारीरिक क्षमता बढती है। और आप का बच्चा भी सेहतमंद रहता है।
  • यदि अल्ट्रासाउंड का परिक्षण हो चूका है और भ्रूण का कोई हिस्सा नहीं बचा है तो डॉक्टर आप को हॉस्पिटल से छुट्टी दे देंगे और आराम के लिए कहते है।
  • यदि आप का बच्चा गर्भाशय में खतरे में है या डिलीवरी का समय पूरा हो चूका है| परन्तु फिर भी डिलीवरी नहीं हो रही है तो ऐसे में सिजेरियन डिलीवरी करवा कर बच्चे को बाहर निकला जाता है। सबसे अच्छा तरीका योनि के द्वारा प्रसव करना ही होता है।

प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग रोकने के घरेलु उपाय (Home Care for Bleeding During Pregnancy in Hindi)

यदि आप को गर्भाशय के शुरवाती समय में रक्तस्त्राव होता है और आप कही ऐसी जगह पर हो जहा पर आस-पास कोई डॉक्टर भी नहीं होता है, तो ऐसे में आप निम्नलिखित  घरेलु उपाय को अपना सकते है।

  • जितना हो सके आराम करे।
  • भारी वजन या किसी भी प्रकार के वस्तु को न उठाए।
  • संभोग (सेक्स) न करे।
  • टैम्पॉन का इस्तेमाल करे।
  • अधिक से अधिक पानी का सेवन करे।

इस बात का ध्यान रहे की गर्भवस्था के आखरी दिनों में रक्तस्त्राव का इलाज नहीं हो सकता। इसलिए आप को समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे।

गर्भवस्था में ब्लीडिंग का निदान (Bleeding during Pregnancy Diagnosis in Hindi)

गर्भवस्था के दौरान डॉक्टर आप को अल्ट्रासाउंड परिक्षण करने की सलाह देते है। क्योकि वह यह सुनिश्चित करना चाहते है की कही एक्टोपिक गर्भवस्था के कारण तो नहीं हो रहा है। यदि किसी कारणवश गर्भवस्था में खून की कमी होती है तो आप के नसों द्वारा IV पदार्थ छोड़ा जाता है, या आप को सर्जरी करवाना पड़ती है।

गर्भवस्था में ब्लीडिंग के दौरान करने वाले टेस्ट (Test Taken After Bleeding during pregnancy in Hindi)

  • प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने पर डॉक्टर आप को कुछ टेस्ट करवाने की सलाह देता है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि आप ऐसा करते है तो आप को और आप के बच्चे को नुकसान हो सकता है।
  • मूत्र परिक्षण करने से मूत्र पथ में इन्फेक्शन का पाता लगाया जाता है। यह इसलिए भी जरुरी होता है की यदि मूत्र पथ में संक्रमण होने यह गर्भपात का कारण भी बन सकता है।
  • इसके बाद आप के रक्त की जांच की जाती है इसमें रक्ते के प्रकार जैसे पॉजिटव और निगेटिव आदि को चेक किया जाता है। यदि आप का ब्लड पॉजिटिव और लड़के के पापा का ब्लड निगेटिव है तो आप का शरीर बच्चे के रक्त कोशिकाओं के प्रति एंटीबॉडी बना सकता है। यदि यह स्थिति उपलब्ध होती है तो जब आप दुबारा माँ बनोगी तब ये एंटीबॉडी आप के बच्चे को नुकसान पहुचायेगी।
  • अल्ट्रासाउंड में ध्वनि के माध्यम से आप भ्रूण को देख सकते हो और उसकी स्थिति का भी पता लगा सकते हो।
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