प्रेग्नेंसी में बी.पी. कम के होने लक्षण,कारण और इलाज | Symptoms, Causes of Low Blood Pressure in Pregnancy in Hindi

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प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होते है। इस समय में ब्लड प्रेशर (symptoms of low blood pressure in pregnancy in hindi) बढ़ना या कम होना एक आम समस्या होती है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के हार्मोन में बदलाव होते रहते है, जिसके कारण उनको बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसके कारण ब्लड प्रेशर में असंतुलन हो जाता है और महिलाओं की बी पी कम होने का खतरा रहता है।

आमतौर पर गर्भवती महिलाओं में यह समस्या दूसरी और तीसरी तिमाही में होती है। प्रेग्नेंसी के दौरान बी पी लो होना एक बहुत ही गंभीर समस्या होती है। इसमें गर्भवती महिलाए घरेलु उपचार करके ब्लड प्रेशर को कम करने का काम करते है।ब्लड प्रेशर को हाइपरटेंशन भी कहा जाता है।

ब्लड प्रेशर लो होने पर महिलाओं में घबराहट होने लगती है, और पसीना भी अधिक आता है। गर्भवती के दौरान महिलाओं का सर्क्युलेटर सिस्टम बहुत तेज हो जाता है और बच्चे को जन्म देने के बाद बी पी अचानक कम हो जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान बी पी लो होने से बच्चे को भी खतरा रहता है। आज हम आप को इस पोस्ट के माध्यम से गर्भवस्था में बी पी लो होने के लक्षण, बी पी लो होने पर इलाज,बी पी लो के कारण बच्चे पर होने वाले नुकसान, गर्भवस्था में बी पी लो होने के घरेलु उपचार के बारे में विस्तार से बताएंगे।

गर्भवस्था (प्रेग्नेसी) में लो ब्लड प्रेशर के लक्षण (Symptoms of Low Blood Pressure in Pregnancy in Hindi)

यह बात उतनी ही सही है की लो ब्लड प्रेशर होने से गर्भवती महिलाओं को कोई नुकसान नहीं होता है। जिन महिलाओं को पहले लो ब्लड प्रेशर का अनुभव नहीं होगा उन महिलाओं को उनके लक्षण प्रभावित करेंगे। गर्भवस्था के दौरान बी पी लो होने के लक्षण (symptoms of low blood pressure in pregnancy) निम्नलिखित है।

  • सांस लेने में परेशानी होना।
  • चक्कर आना।
  • खड़े होने पर अचानक सिर घूमना।
  • मचलाहट होना।
  • घबराहट होना।
  • उलटी होना।
  • ठंड लगना या चिपचिपा पसीना आना।
  • प्यास अधिक लगना।
  • शरीर में दिनभर थकान महसूस करना।
  • आखो से संबधित परेशानी जैसे:- धुन्दला या दोहरी चीजे दिखाई देना।
  • अवसाद (डिप्रेशन) होना।

यदि प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी महिला को इन लक्षणों का आभास होता है| तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इनमे डॉक्टर यह पता करेंगे की यह लक्षण बी पी लो के है की नहीं इसकी जांच करने के लिए डॉक्टर कुछ परिक्षण कर सकते है।

गर्भवस्था (प्रेग्नेंसी) में बी पी लो कब माना जाता है (Pregnancy Me Low BP Kab Mana Jata Hai)

गर्भवस्था के दौरान ब्लड प्रेशर का स्तर बच्चे और माँ दोनों के स्वास्थ के लिए संकेत करते है। इस ब्लड प्रेशर के निश्चित आकड़ो के आधार पर डॉक्टर्स  को गर्भवती महिलाओं को होने वाली संभावित समस्याओं को पता लगाने में सहायता मिलती है।ब्लड प्रेशर को एक मशीन के द्वारा चेक किया जाता है। यह मशीन शरीर में रक्त के उच्च और निम्न स्तर के आकड़ो को प्रदर्शित करती है। गर्भवस्था की शुरवाती 12 सप्ताह में महिलाओं के ब्लड प्रेशर में कमी आती है। इसमें पहली और तीसरी तिमाही में ब्लड प्रेशर का स्तर लगातार कम बना रहता है और तीसरे तिमाही में यह धीरे -धीरे सामान्य होने लगता है। प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से जांच कराने की सलाह देते है।

गर्भवस्था (प्रेग्नेंसी) में लो ब्रेड प्रेशर का कारण (Reason for Low Blood Pressure in Pregnancy)

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में बदलाव होने लगता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को बार-बार चेकप करवाते रहना चाहिए। इसी दौरान डॉक्टर महिलाओं से उनके दिनचर्या के बारे में पूछते रहते है। इसे बहने डेली चेकप भी हो जाती है। गर्भवस्था में ब्लड प्रेशर में होने वाले बदलाव के कारण उनकी दिनचर्या, तनाव और घबराहट पर निर्भर करता है।

ब्लड प्रेशर के लो होने के निम्नलिखित कारण होते है।

  • एनीमिया
  • निर्जलीकरण
  • संक्रमण होना।
  • कुपोषण होना ।
  • आतंरिक रक्तस्त्राव होना।
  • अधिक समय तक बिस्तर पर आराम करना।
  • हृदय से सबंधित विकार।
  • अंतःस्त्रावी विकार।

विभिन्न प्रकार की दवाइयों का सेवन करने से गर्भवती महिलाओं को ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है। इसीलिए किसी भी दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर से संपर्क अवश्य करना चाहिए। महिलाओं में प्रेग्नेंसी के शुरवाती समय में ब्लड प्रेशर लो होने से महिलाओं को एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होने का खतरा होता है। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में अंडा गर्भाशय की जगह फैलोपियन ट्यूब में तैयार होने लगता है। जिसके कारण बहुत सी समस्याए पैदा होती है।

क्या गर्भवती (प्रेग्नेसी) महिला का बी पी लो होने से बच्चे को खतरा हो सकता है

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में बी पी लो होने की संभावना होती है, जिसमे महिलायो को बेहोश होने का खतरा होता है। लो बी पी  समस्याओं वाली  महिलाओं को बैठने और उठने में चक्कर आते है। गर्भवस्था के दौरान बार-बार बेहोश होने पर बच्चे पर भी असर होता है। अंदरूनी समस्या में रक्त में कमी होने के कारण गर्भवती महिलाओं को चक्कर और चोट भी लग सकती है। इसके साथ ही साथ लो बी पी के कारण महिलाओं के पेट में पल रहे बच्चे पर भी बुरा असर पड़ता है और बच्चे की डिलेवरी करने में भी परेशानी होती है।

डॉक्टर और कुछ विशेषज्ञ के अध्ययन और रिसर्च से यह पता चला है की यदि किसी महिला की गर्भवती के दौरान बार-बार बी पि लो हो जाती है। तो उसका उसके शरीर और बच्चे पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है। इसलिए प्रेग्नेसी के दौरान ब्लड प्रेशर का चेकअप नियमित रूप से करवाते रहना चाहिए।

गर्भवस्था (प्रेग्नेंसी) में लो बी पी होने का इलाज (Treatment of Low Blood Pressure in Pregnancy)

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में बीपी लो होना एक आम समस्या हो गई है। इस समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टर कुछ दवाई खाने की सलाह देते है।लेकिन महिलाए इस समस्या को दूर करने के लिए घरेलु उपायों का उपयोग करते है। बीपी लो प्रेग्नेंसी के शुरवाती समय पहिला महीना और तिमाही में होती है। परन्तु तिमाही में महिलाओं में बीपी सामान्य हो जाती है। परन्तु जिन महिलाओं का गर्भवती के समय अधिक बीपी लो हो जाता है ऐसे महिलाओं को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, और उनसे सलाह लेना चाहिए।

डॉक्टर और चिकित्सक इलाज के अलावा महिलाए अपना इलाज घरेलु उपायों को अपनाकर भी कर सकते है और यह उपाय निम्नलिखित है।

पानी अधिक मात्रा में पिए

प्रेग्नेंसी के दौरान कई बार महिलाओं को सुबह उठते से ही जी मचलाने के साथ उल्टिया भी होती है। जिसके कारन शरीर में पानी की कमी होती है।ऐसी अवस्था में शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड प्रेशर कम होने का खतरा रहता है। इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को जितना हो सके अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए। यदि लो बीपी के कारन आप को चक्कर आ रहे हो तो आप हर्बल टी का सेवन कर सकते हो, जिससे आप को फायदा मिलता है।

जल्दबाजी न करे और आराम करे

गर्भवती महिलाओं को ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करने के लिए अपने काम को धीरे- धीरे करना चाहिए। गर्भवती महिला को सुबह उठते समय आराम से उठना चाहिए। क्योंकी सुबह जल्दबाजी में उठने से कई बार आप को चक्कर भी आते है और यह बीपी लो होने के कारन होता है। यदि किसी महिला को चक्कर आते है या जिनका ब्लड प्रेशर लो रहता है, उन महिलाओं को आराम से बैठना या उठने चाहिए, और तेज सास लेने से भी बचना चाहिए। इसके अलवा लेटते समय बाई और करवट लेकर ही लेटना चाहिए क्योकि ऐसा लेटने से हृदय तक खून पहुंचने में आसानी जाती है।

कपडे आरामदायक पहने

टाइट कपडे पहनने से आप को घबराहट और बैठने में भी परेशानी होती है। इसिलिए गर्भवती महिलाओं को ब्लड प्रेशर की समस्या से बचने के लिए आरामदायक कपडे पहनना चाहिए। आरामदायक कपडे पहनने से महिलाओं में चक्कर और थकान आने की परेशानी से छुटकारा मिलता है। यदि आप का बीपी लो होतो आप को टाइट कपडे पहने से बचना चाहिए।

आहार पर ध्यान दे

गर्भवती के दौरान महिलाओं को डॉक्टर के सलाह के अनुसार ही भोजन करना चाहिए। ऐसे समय में डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को एक साथ भोजन करने से मना करते है और थोड़ा -थोड़ा भोजन करने की सलाह देते है। प्रेग्नेसी के दौरान डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को अधिक नमक खाने की सलाह देते है। जबकि सामान्य स्थिति में अधिक नमक का सेवन करना हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है। इसलिए गर्भवती महिला को डॉक्टर के कहने के हिसाब से ही नमक का सेवन करना चाहिए।

 

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