साइटिका क्या है? इसके कारण और इलाज | Treatment and Symptoms of Sciatica in Hindi

sciatica in hindi

Sciatica ke lakshan in Hindi साइटिका साइटिक तंत्र में होने वाला एक प्रकार का दर्द होता है जो रीढ़ की हड्डी से होते हुए कूल्हे, नितम्बो और पेरो के निचले हिस्सों तक पहुँचता है। यह बीमारी अधिकतर उठने-बैठने के गलत तरीको के कारन होती है। खासतौर पर साइटिका में शरीर के एक हिस्से में दर्द होता है, नसों के हिस्से में दबाब बढ़ने से हाथ -पेरो में झुनझुनाहट और सूजन हो जाती है। साइटिका बहुत ही गंभीर बीमारी होती है। यदि आप इसका समय पर इलाज नहीं करवाते हो तो यह बड़ा रूप धारण कर लेती है, और उस समय आप को सर्जरी भी करवाना पड़ सकती है। आज हम आप को साइटिका क्या है? इसके कारन और इलाज के बारे में बताएंगे ।

साइटिका के लक्षण (Sciatica Symptoms in Hindi)

साइटिका (sciatica in hindi) का लक्षण बहुत ही अलग प्रकार का दर्द होता है। इसमें पीठ में दर्द होता है और हाथ -पेरो में सूजन भी होता है। साइटिका के और भी कुछ निम्नलिखित लक्षण होते है।

  • कमर दर्द    ( और पढ़े:- पेट दर्द के घरेलु उपचार)
  • रीढ़ की हड्डी सकरी होना।
  • पैरो के निचले हिस्से में दर्द होना।
  • हाथ -पैरो में सूजन या सुन्न हो जाना।
  • पैरो में झुनझुनी या जलन का अनुभव।
  • बैढते समय दर्द का अधिक हो जाना।
  • पैरो को हिलाने में दर्द होना।
  • तीव्र पीड़ा होना या उठने में दर्द होना।
  • पिंस से लेकर सुई तक की संसेसन महसूस कर सकते हो। जिससे आप के पैरो की उंगलिया और पैरो में झुनझुनाहट का अनुभव होता है।

साइटिका होने के कारण (Sciatica Causes in Hindi)

साइटिका तंत्रिका आप की रीढ़ की हड्डी से जुडी हुई होती है। जो कमर से सबंधित नसों से होती है। इसमें पीठ दर्द होता है, यह बीमारी निचे गिरने से या साइटिका तंत्रिका ट्यूमर के कारण होती है।

निम्नलिखित कुछ ऐसी स्थितियां है जो साइटिका का कारण हो सकता है।

स्पाइनल स्टेनोसिस (Spinal Disc) :- स्पाइनल स्टेनोसिस कमर से सबंधित रीढ़ की हड्डियों को स्टेनोसिस भी कहा जाता है। यदि आप की रीढ़ की हड्डियों के निचले भाग के संकुचन इसकी विशेषताए है। यह संकुचन साइटिका तंत्रिका और रीढ़ की हड्डियों पर दबाव डालने का काम करती है।

हर्नियेटेड डिस्क (Herniated Disc):- हर्नियेटेड डिस्क को स्लिप डिस्क (Slip disk) भी कहा जाता है। यह रीढ़ की हड्डी कार्टिलेज के टुकड़ो से अलग होती है। कार्टिलेज एक गाढ़े साफ़ पदार्थ से भरा हुआ रहता है जो हड्डियों को चारो तरफ घुमाने का काम करता है। यह बीमारी तब होती है जब कार्टिलेज की पहली परत हट जाती है। अंदर के पदार्थ साइटिका तंत्रिका को संकुचित करने का काम करती है। जिसके कारण शरीर के निचले हिस्से में सुन्नता या दर्द होता है। अमेरिकन अकादमी ऑफ़ ऑर्थपेडिक के अनुसार यह अनुमान लगाया गया है की प्रत्येक 50 में से एक व्यक्ति को हर्नियेटेड डिस्क की बीमारी होती है।

पिरिफोर्मिस सिंड्रोम (Piriformis syndrome):- पिरिफोर्मिस सिंड्रोम एक विभिन्न प्रकार का दुर्लभ विकार होता है। जिसमे साइटिका के कारण पिरिफोर्मिस मांसपेशिया संकुचित या कस जाती है। पिरिफोर्मिस मांसपेशी वह होती है जो आप की रीढ़ की हड्डी को जांघ से जोड़ने का काम करती है। जब है मांसपेशी कड़ी हो जाती है तो यह आप की साइटिका तंत्रिका पर जोर डालने का काम करती है। जिससे साइटिका होने का खतरा होता है। यदि आप लम्बे समय तक बैठे रहते है या कही से गिर जाते हो तो ऐसी स्थिति में पिरिफोर्मिस सिंड्रोम होने का खतरा होता है।

स्पोन्डयलोलिस्थेसिस (Spondylosis):– स्पोन्डयलोलिस्थेसिस डिजनरेटिव डिस्क विकार स्थितियों में से एक है। जब कभी रीढ़ की हड्डी या कशेरुक एक दूसरे के आगे बढ़ जाती है तो यह स्थिति उपलब्ध होती है।

साइटिका होने के जोखिम (Risk Factors for Sciatica in Hindi)

साइटिका (sciatica in hindi) निम्नलिखित जोखिमों के कारण भी हो सकता है।

  • बढ़ती हुई उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी में परिवर्तन होता है| जिससे वह खिसक भी सकती है या उसमे गाठ भी बन सकती है। यह साइटिका होने का मुख्य कारण भी होता है।
  • साइटिका होने का कारण मोटापा भी हो सकता है। क्योकि मोटापा बढ़ने से आप के शरीर का वजन भी बढ़ जाता है। जिसके कारण रीढ़ की हड्डी पर तनाव बढ़ जाता है और इसमें परिवर्तन होना शुरू हो जाता है।
  • लम्बे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहना या पीठ पर भरी सामान उठने के कारण भी साइटिका होने का खतरा रहता है।

डाइबिटीज के मरीजों को साइटिका होने का खतरा अधिक रहता है। क्योकि यह शरीर के उस हिस्से को प्रभावित करता है। जहा से शरीर ब्लड शुगर का उपयोग करता है। जिसके कारण तंत्रिका को टूटने का खतरा रहता है।

साइटिका का परिक्षण / निदान (Sciatica Diagnosis in Hindi)

यदि आप को साइटिका के लक्षण महसूस हो रहे है या यह हलके है तो यह ५-६ दिनों तक महसूस होती है बाद में दर्द कम हो जाता है। परन्तु यह अधिक है तो यह लम्बे समय तक रहते है। ऐसे में आप को डॉक्टर के पास जाकर उनसे विचार – विमर्श करना चाहिए। साइटिका का परिक्षण करने से पहले डॉक्टर आप से आप की चिकित्सक इतिहास के बारे में जानकारी लेंगे, की पहले आप को कभी चोट आई थी क्या या आप के पीठ या पैरो में दर्द हो रहा है की नहीं या आप अभी कैसा महसूस कर रहे हो आदि बाते परिक्षण के दौरान होती है। उसके बाद आप के शारीरिक शरीर का परीक्षण होता है। जिसमे आप की मॉंसपेशियो की ताकत का परीक्षण किया जाता है । इसमें आप को कुछ शारीरिक व्यायाम करने को भी कहेंगे जिससे तुम्हारी हड्डियों को चेक किया जाता है। सबसे आम टेस्ट इमेजिंग टेस्ट होता है जिसमे साइटिका का परिक्षण और उसके कारण का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसमें रीढ़ की हड्डी का एक्स -रे, एमआरआई और सिटीस्केन आदि से साइटिका तंत्रिका का पता लगाया जाता है। इस टेस्ट में साइटिका तंत्रिका के संकुचित होने के कारण और लक्षणों की जांच भी की जाती है।

साइटिका का इलाज (Sciatica Treatment in Hindi)

साइटिका का इलाज इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। यह प्रत्येक मनुष्य को अलग -अलग होती रहती है। साइटिका के दर्द के लिए निर्धारित दवाइयों के प्रकार में शामिल है।

  • नारकोटिक्स दवाई
  • सूजन विरोधी दवाई
  • स्नायु शिथिलता की दवाई
  • उद्वेग विरोधी दवाई
  • शारीरिक चिकित्सा में।

साइटिका के हल्क़े दर्द का इलाज (Satika Ka Ilaj)

यदि आप को साइटिका का दर्द हल्का है तो आप इसे दर्द निवारक गोलिया लेकर ख़त्म कर सकते है।

  • हल्क़े दर्द वाले मरीज को डॉक्टर स्ट्रेचिंग या हल्का सा व्यायाम करने को कहते है।
  • जिस जगह आप को दर्द हो रहा है। उस जगह गर्म या ठन्डे पैक से सेकने पर दर्द कम हो जाता है।

पुरानी साइटिका का इलाज (Satika Ka Ilaj)

पुरानी साइटिका का इलाज (Satika Ka Ilaj) निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखकर किया जाता है।

  • इसमें मरीजों को फिजिकल थेरेपी दी जाती है।
  • यदि आप की बीमारी लम्बे समय तक ठीक नहीं हो रही है तो उसके बाद आप को सर्जरी करके ही इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है।
  • कमर पर आने वाले दबाव को कम करने के लिए रीढ़ की हड्डियों को चौड़ा किया जाता है। जिसे लम्बर लेमीनेक्टॉमी कहते है।
  • खिसकी हुई डिस्क को आंशिक रूप से बाहर निकाल दी जाती है।

साइटिका से बचाव (Sciatica Prevention in Hindi)

साइटिका (sciatica in hindi) का निम्नलिखित प्रकार से बचाव किया जा सकता है।

  • यदि आप बैठते समय सही तरीके से बैठते है तोआप को साइटिका होने का खतरा कम होता है।
  • नियमित रूप से व्यायाम करने से साइटिका को रोका जा सकता है। क्योकि रोज व्यायाम करने से आप की मांसपेशिया मजबूत हो जाती है।
  • सही मुद्रा में बैठने के लिए ऐसी कुर्सी का चयन करे जिससे आप की कमर को पीछे से सपोर्ट मिले।
  • कुर्सी पर बैठते समय कमर के पीछे तकिया या टॉवेल का यूज़ करना चाहिए।
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