टेस्ट ट्यूब बेबी क्या है | Test Tube Baby in Hindi

IVF in hindi

आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य इतना व्यस्त हो गया है| की उसका सारा असर उसकी जीवनशैली पर पड़ता है। क्योकि आज देशभर में कई लोग ऐसे है जो प्रजनन समस्या को लेकर बहुत परे शान है| इन सबका कारन उनकी ख़राब जीवन शैली और तनाव के कारन आराम, डाइट, सही तरीके से व्यायाम भी नहीं कर पाते। इसका सीधा असर उनके स्वास्थ पर पड़ता है। जिसके कारन कई मनुष्य बांझपन का जीवन जीते है,और माँ-बाप  बनने का सुख भी भोग नहीं पाते है। परन्तु आज टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ गई है की आप माँ-बाप बनने का सुख भोग सकते हो। आज हमारे पास एक ऐसी तकनीक है हमारा शरीर साथ दे या न दे फिर भी हम माँ-बाप बन सकते है|  टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby in hindi) एक ऐसी तकनीक है जिससे बच्चा पैदा किया जा सकता है। इस बच्चा पैदा करने वाली तकनीक को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (VIF) भी खा जाता है।

 IVF की प्रोसेस (Test Tube Baby Process in Hindi)

आजकल के प्रदूषित वातावरण, खानपान में बदलाव, काम काज का बोज ज्यादा होने के कारन महिलाओं के शरीर में बहुत सारि परेशानिया उत्पन्न होती है जिसके चलते महिलाओं में प्रेग्नेंट नहीं हो पाना एक समस्या बनती जा रही है। परन्तु साइंस इतना आगे बढ़ गया है की आप माँ-बाप का सुख भोग सकते हो। इनमें से एक टेक्नोलॉजी इन विट्रो फर्टिलाजेशन/ आईवीएफ (In vitro fertilization) जिसे हम अपनी नार्मल भाषा में टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby in hindi) के नाम से भी जाना जाता है। जिसके कारन महिलाओं के गर्भधारण में सहायता मिलती है।

टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby in hindi) या आईवीएफ एक ऐसे प्रक्रिया है (IVF success rate) जिसमे महिलाओं के अंडाशय से अंडाणु को बहार निकलजाता है और उसको पुरुषो के शुक्राणु के साथ लेब्रोटरी में निषेचित किया जाता है। निषेचित अंडे और शुक्राणु को मिलाकर भ्रूण तैयार होने का पहले चरण की शुरवात हो जाती है। इसके बाद तैयार हुए भ्रूण को  महिला के गर्भ में डाला जाता है उसके बाद बच्चा तैयार होने की शुरवात हो जाती है।

टेस्ट ट्यूब बेबी (test tube baby in hindi) की प्रक्रिया में पत्नी के अंडाणु और पति के शुक्राणु को लेब्रोटरी में टेस्ट करके मिलाया जाता है। परन्तु इन दोनों मेसे किसी एक के शुक्राणु या अंडाणु में परेशानी हो तो किसी तीसरे डोनर के अंडाणु या शुक्राणु को मिलाया जाता है। जिससे बच्चे के भ्रूण तैयार होने में आसानी हो।

इनफर्टिलिटी (Infertility)

इनफर्टिलिटी (infertility) एक ऐसी समस्या है| जो पुरुषो में पाई जाती है । वह पुरुष जिसमें स्पम्स या शुक्राणु की मात्रा कम होने के कारन वह किसी महिलाओं को गर्भवती बनाने में असक्षम होते है।

ओवुलेशन साइकल (ovulation cycle) में अस्थिरता

जिन महिलाओं को थाइरॉइड्स के परेशानी होती है। उनको ओवुलेशन की समस्या होती है| इसमें महिलाओं के भीतर अंडाणु का निर्माण नहीं होता है या फिर अंडाणु के निर्माण साइकल में गड़बड़ी होती है। जिसके कारन उसको गर्भवती बनने में परेशनिया आती है।

फलोपियन ट्यूब (fallopian tube) और ओवरी

गर्भवती न बनने का कारन फेलोपियन और ओवरी ट्यूब भी हो सकता है।

आईवीएफ क्यों और कब करवानी चाहिए। (IVF Benefits in Hindi)

आईवीएफ (IVF in hindi) एक बहुत ही गंभीर समस्या है। इसको करवाने से पहले किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह अवश्य ले। आपको निम्न स्थितियों में आईवीएफ (IVF in hindi) प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है।

  • महिलाओं में बांझपन
  • यदि किसी महिलाओं की अंडाशय से गर्भाशय को जोड़ने वाली फेलोपिन ट्यूब में परेशानी हो।
  • पुरुष बांझपन की समस्या में।
  • पति के फ्रोजन या जमे हुए शुक्राणु का उपयोग किया जा रहा हो। परन्तु आईयूआई (IUI) तकनीक आप के लिए उपयुक्त नही है।
  • यदि किसी महिला का मासिक धर्म चक्र उम्र से पहले ही आना बंद हो जाता हो तो।
  • यदि आप पाने बच्चे को अपनी किसी अनुवांशिक करने के कारन भ्रूण टेस्ट करवा रहे हो तो।
  • किसी महिला के अंडाशय में अंडे नहीं बन पा रहे है।
  • यदि आप ५०-५५ वर्ष के उम्र के बाद बी गर्भधारण करने की सोच रहे हो तो ऐसे में कोई अन्य प्रजनन प्रक्रिया काम करने में असफल हो रही हो तो उस समय इसका इस्तेमाल कर सकते है।

IVF के Side Effect

आमतौर पर टेस्ट ट्यूब बेबी (Test tube baby / IVF) या आईवीएफ के कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है। परन्तु इस तकनीक में फर्टिलाजेशन बढ़ने वाली दवा के कारन महिलाओं को पेट दर्द, सिर दर्द, सास फूलना आदि परेशानियाँ हो सकती है। ऐसी बहुत कम महिलाये है जिनमे ओवरियन हैपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम होने की सम्भावन होती है। जिसके कारन उनको पेट, सीने में एक द्रव एकत्रित होता है।  जिसके कारन  उनको  पेट दर्द, सीने में दर्द, पेशाब कम आना, अचानक वजन बढ़ना या काम होना, कब्ज, स्तनों में सूजन,और प्रिमोचर बर्थ आदि परेशानी होती है।इसके अलाव यदि आप को भरी मात्रा में खून आ रहा हो, पेशाब के साथ खून आना ,प्राइवेट जगह दर्द होना, बुखार आना आदि समस्याएं हो रही हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाए और उनसे सलाह ले।

आईवीएफ के बाद प्रेग्नेंसी को कितना समय लगता है।

गर्भाशय में भ्रूण को स्थानांतरित करने के बाद आप को दो सप्ताह तक इंतजार करने की आवश्यकता होती है। इसके बाद आप प्रेग्नेंसी टेस्ट कर सकते हो परन्तु प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य ले। आप प्रेग्नेंसी टेस्ट को अपने डॉक्टर के कहने से घर पर भी एक सामान्य प्रक्रिया मूत्र गर्भाशय परिक्षण या रक्त परिक्षण से भी कर सकते है और उसका रिजल्ट डॉक्टर को बताए। यदि आप गर्भवती हो जाती हो और आप को ये जानना है की सबकुछ नार्मल है की नहीं इसकेलिए डॉक्टर द्वारा बताये गए  अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन किये जाना चाहिए।

यदि किसी कारणवश आईवीएफ असफल हुआ हो तो इसके लिए आप को पहलेसे ही तैयार होना चाहिए। और किसी एडवाइजर की सलाह लेना चाहिए।

आईवीएफ (IVFin hindi) के बाद क्या खाना चाहिए / सावधानियाँ

गर्भाशय में भ्रूण धारण करने के बाद उसको बढ़ने के लिए आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते है क्योकि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है|  आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी (Test tube baby) करवाने के बाद यह जरुरी नहीं है, की आप को आराम करना है या काम पर लगना है। कोई-कोई डॉक्टर आईवीएफ (IVFin hindi) के बाद आराम करने की सलाह देते है।तो कोई तुरंत अपने दिनचर्या में लग जाते है। आप को बता दे की रोजमर्या की दिनचर्या का काम करने से गर्भ भ्रूण पर कोई असर नहीं पड़ता है। टेस्ट टब बेबी या आईवीएफ के बाद गर्भधारण करना भी एक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है। जो अंडाणु की गुणवत्ता पर निर्भर रहता है। यदि आप चाहे तो हमने आप के लिए आईवीएफ के बाद कुछ सावधानियाँ बताई है । जिससे आप को और आप बच्चे को स्वस्थ रख सकते है।

  • यदि आप ने आईवीएफ करवाया है तो ज्यादा शारीररक क्षमता वाले काम न करे।
  • एक्सरसाइज करते समय भारी सामान उठाने से बचे।
  • शराब या धूम्रपान का सेवन न करे। जिससे भ्रूण पर गलत असर पड़ता है।
  • यौन संबंध न बनाये।
  • गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन न करे।
  • अधिक समय तक धुप में न घूमे और जिम करने से बचे।

क्या आईवीएफ सफल होती है। (kya IVF safal hoti hai)

यदि आप डॉक्टर के बताए गए निर्देशानुसार उनका पालन करते है तो आईवीएफ (IVF meaning in hindi) पूरी तरह से सफल होता है। 2010 में किये गए अध्यन में आईवीएफ (IVF meaning in hindi) के निम्नलिखित आकड़े सामने आए थे।

30-35 वर्ष की महिलाओं के लिए 31.2%

36-41 वर्ष की महिलाओं के लिए 26.7%

41-45 वर्ष की महिलाओं के लिए 12.6%

45 से अधिक वर्ग की महिलाओं के लिए 1.8%

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