यूरिन इन्फेक्शन क्या है? लक्षण और बचाव | What is Urine infection in Hindi, Symptoms and Prevention

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यूरिन इन्फेक्शन (Urine infection in Hindi) या जिसे हम साधारण भाषा में मूत्र मार्ग संक्रमण भी कहा जाता है। यह समस्या पुरुषो और महिलाओं बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती है। आजकल की बीजी लाइफ में ऐसी समस्याए होती रहती है। यह एक आम समस्या बन गई है। यह समस्या ज्यादातर पेशाब को लम्बे समय तक रोकने के कारन होती है। क्योकि आप सभी जानते है की तालाब के रुके हए पानी में बेक्टेरिया उत्पन्न हो जाते है, ठीक उसीप्रकार मूत्र या पेशाब को ज्यादा देर तक रोक कर रखने से यूरिन इन्फेक्शन (urine infection in hindi) या मूत्र मार्ग संक्रमण जैसी बीमारिया होने की संभावना होती है। यह समस्या अधिकतर मधुमेह (Diebetic) के मरीजों और गर्भवती महिलाओं में पेशाब के समय जलन होने में पाई जाती है। वैसे तो यह एक आम समस्या है| परन्तु  इसे नजरंदाज नहीं कर सकते है। इसके कई सारे लक्षण होते है जैसे:- पेशाब करते समय जलन होना, बार-बार पेशाव आना, बुखार आना, जी मचलाना, कमरदर्द आदि समस्याए होती है। यूरिन इन्फेक्शन की समस्या अधिकतर उन लोगो को होती है जो लम्बे समय तक बैठे रहते है या पेशाब को रोक कर रखते है। भारत में यह समस्या महिलाओं ,पुरुषो,और नौजवान बच्चो में पाई जाती है। इन बीमारियों के लिए मार्किट में बहुत सारि दवाई उपलब्ध है। और इसके लिए कुछ घरेलु नुस्खे भी उपलब्ध है।

यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण (Urine Infection Symptoms in Hindi)

यूरिन इन्फेक्शन या मूत्र मार्ग संक्रमण एक आम समस्या बनती जा रही है| इन सबका कारन है खान-पान में बदलाव और बीजी लाइफ स्टाइल के कारन मनुष्य अपने शरीर पर ध्यान नहीं दे पाता। यदि आप पेशाब या मूत्र को लम्बे समय तक रोक कर रखते है, तो आप को यह समस्या हो सकती है। इन समस्या के कुछ लक्षण (urine infection ke lakshan) निचे दिए गए है।

  • पेशाब करते समय जलन (peshab mein jalan) होना।
  • पेशाब से बदबू आना।
  • मूत्र का कलर गहरा होना।
  • बुखार आना।
  • शरीर के गुप्तांगो में खुजली जैसी समस्याए होना।
  • कमर में दर्द होना।
  • मूत्र का रुक रुक कर आना।
  • पानी कम पीना।
  • छोटे बच्चो में पीलिया ,बुखार या चिड़चिड़ापन आदि लक्षण होते है।
  • शुगर वाले मरीजों में ज्यादा पाया जाता है।
  • गर्भवस्थ के दौरान इन्फेक्शन होना।
  • लड़कियों में यह महवारी के समय ज्यादा फैलती है।
  • साफ सफाई का ध्यान न रख पाना।
  • भूख न लगना।
  • पेशाब का जल्दी निकल जाना।
  • पेशाब करते समय ब्लड निकलना।
  • थकान और कमजोरी होना।

यदि ऊपर दी गई लिस्ट में से आप को किसी भी प्रकार के लक्षण (urine infection symptoms in hindi) का अनुभव होता है| तो आप सबसे पहले डॉक्टर के पास जाकर उनकी सलाह ले और यूरिन टेस्ट जरूर करे।

यूरिन इन्फेक्शन क्यों होता है? (Urine infection / UTI kya hai)

मूत्र जननांग के क्षेत्र में मूत्र को ज्यादा देर तक रोकने से उसमे बेक्टेरिया उत्पन्न हो जाता है।जिससे यह  मूत्र संक्रमण का रूप धारण कर लेता है। यूरिन इन्फेक्शन आज कल आम बात हो गई है। ये अधिकतर लाल मिर्च मसाले के सेवन से, शराब अधिक पिने से, दूषित पानी पिने से,इन कारणों  से होता है। यूरिन ब्लडर में यूरिन एकत्रित होने के कारन भी यह समस्याए होती है। यदि आप अधिक समय ताम बीमार चल रहे हो तो उसमे भी यह आप को हो सकता है। यु टी आई  आप के मूत्र मार्ग में कही भी हो सकता है। इन सभी चीजों से परहेज करे और इनका ध्यान अवश्य रखे|

यूरिन इन्फेक्शन (युटीआई) के प्रकार (Types of Urine infection in Hindi)

मूत्र मार्ग संक्रमण या यूरिन इन्फेक्शन मूत्र तंत्र के किसी भी हिस्से पर होने वाला संक्रमण है।उनको उनके स्थिति के आधार पर निम्न लिखित भागो में विभाजित किया गया है।

  • सीस्टाइश या मूत्राशय का संक्रमण (Cystitis infection):- यह मूत्राशय के अंदर होने वाला संक्रमण रोग होता है। जो कमजोर इम्युनि सिस्टम वाले व्यक्तियों में ईस्ट भी मूत्राशय का कारन होता है।
  • पाइलोनेफ्रईटिस / गुर्दा संक्रमण (pyelonephritis infection) :- यह किडनी में होने वाला इन्फेक्शन संक्रमण है। इसमें बुखार, पेशाब में खून,जलन,और श्रोणि में दर्द होता है। गर्भवती महिलाओं में यह इन्फेक्शन अधिक होने की समस्याए अधिक होती है।
  • यूरेथ्राइटिस या मूत्रमार्ग संक्रमण (Urethritis Infection) :- यह भी बेक्टेरिया के कारन होने वाला संक्रमण है। इसमें मूत्रांग में सूजन के कारन होता है। जब मूत्र मूत्राशय से बाहर निकलता है।  तो उस समय दर्द होता है।

यूरिन इन्फेक्शन (यूटीआई) के कारन (Urine Infection Causes in Hindi)

यूरिन इन्फेक्शन होने के कारन ई कोइल (E-Coil) बेक्टेरिया होता है। यह बेक्टेरिया आमतौर पर पाचन तंत्र में मौजूद होता है। यह संक्रमण किसी भी उम्र के और किसी भी लिंग के लोगो को हो सकता है। यूटीआई / यूरिन इन्फेक्शन निम्नलिखित कारणों से होता है।

  • यदि आप अधिक बार या तीव्र गति से सम्भोग करते है तो उसमे भी यह समस्या होती है।
  • मधुमेह वाले मरीजों में।
  • गर्भनिरोधक का उपयोग
  • गुप्तांग की साफ सफाई न करना।
  • दस्त में।
  • गर्भवस्था में।
  • पथरी में।
  • एंटीबायोटिक दवाई का अधिक उपयोग करने में।
  • शुक्राणुनाशकों और टैम्पान का उपयोग।

यूरिन इन्फेक्शन से बचाव (Prevention of Urine Infection in Hindi)

यूरिन इन्फेक्शन वैसे तो एक आम समस्या है। आज हम आप को बताते है की यूरिन इन्फेक्शन से कैसे बचा जा सकता है। निचे कुछ निर्देशन दिए गए है।

  • ज्यादा से ज्यादा पानी पिए और मूत्र का त्यागने की आदत डाले।
  • शराब का सेवन कम करे।
  • सम्भोग करने के तुरंत बाद मूत्र का त्याग करे।
  • नहाने के लिए टब का उपयोग न करे।
  • माहवारी के समय सेनेटरी पैड का उपयोग  करे।
  • ढीले और कॉटन के अंडरवियर पहने।
  • जननांगो में किसी भी प्रकार के खुशबु पदार्थो का उपयोग न करे।

यूरिन इन्फेक्शन का इलाज (Urine Infection Treatment in Hindi)

यूरिन इन्फेक्शन का इलाज (urine infection treatment in hindi) उनके कारणों पर निच्छित  रहता है| की आप की किन कारणों से यह संक्रमण बीमारी हुई है। वैसे तो यह बीमारी बेक्टेरिया के कारण फैलती है। यह अधिकतर उन लोगो को होती है जो जननांग सही तरीके से साफ नहीं करते है, या मूत्रयंग में मूत्र को जल्दी त्यागते नहीं है। इसके इलाज के लिए बहुत सारि एंटीबायोटिक दवाइया होती है| जिसके उपयोग से इसे ठीक किया जा सकता है। यह एक वायरस या फंगी इन्फेक्शन (fungi infection) होता है। यूरिन इन्फेक्शन के इलाज में यदि आप लापरवाही करते हो तो यह किडनी इन्फेक्शन का रूप धारण कर लेता है। यदि निम्नलिखित परिस्थितिया आप के साथ भी है, तो इससे संक्रमित होने पर आप को इलाज के लिए हॉस्पिटल जाना पड़ सकता है।

  • पथरी या मूत्र मार्ग का ऑपरेशन हुआ हो तो।
  • यदि आप गर्भवती ,बीमार या बुजुर्ग हो तो।
  • यदि आप को कैंसर, शुगर, रीढ़ की हड्डी की परेशानी या अन्य स्वस्थ से लेकर कोई समस्या है तो।
  • महिलाओं को बार-बार संक्रमण होने पर।
  • जिन महिलाओं में बार बार मूत्र संक्रमण की समस्याए होती है वह निम्नलिखित उपाय अपना सकती है।
  • यदि आप यौन संपर्क में आते हो तो उसके बाद एंटीबायोटिक दवाई का उपयोग करे।
  • यदि आप को रजोनिवृति हो चुकी हो तो आप योनि एस्ट्रोजन थेरेपी भी अपना सकती है।
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