गर्भाशय कैंसर क्या है? जानिये इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपाय | Uterus Cancer in Hindi

Uterus cancer in hindi

गर्भाशय कैंसर (Uterus Cancer in Hindi) 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को होने की संभावना ज्यादा रहती है, लेकिन कम उम्र में भी यह कैंसर हो सकता है| यह कैंसर गर्भाशय और उसके आस-पास के भागों को प्रभावित करता है, जैसे लीवर, फेफड़े, पेट आदि| महिलाओं में गर्भाशय कैंसर मौत का सबसे प्रमुख कारण है|

यह कैंसर महिलाओं की लापरवाही की वजह से तेजी से बढ़ता जाता है,अक्सर महिलाएं गर्भाशय कैंसर के लक्षणों (uterus cancer ke lakshan in hindi) को नजर अंदाज कर देती है| जिससे यह गंभीर रूप ले लेता है, कुछ महिलाएं तो इसकी सही जानकारी ना होने की वजह से भी चपेट में आ जाती है| शोध के अनुसार यह कैंसर 1 साल की बच्ची तक को हो सकता है|

अगर समय पर सही इलाज मिल जाए तो इस कैंसर से मुक्ति पाई जा सकती है, लेकिन अगर स्थिति बिगड़ गई तो फिर उसे संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है| आज की इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे की गर्भाशय कैंसर क्या है, इसके कारण और लक्षण क्या है तथा इससे कैसे बचा जा सकता है?

गर्भाशय कैंसर क्या है? (What is Uterus Cancer)

इसमें गर्भाशय की स्वस्थ कोशिकाएं अनियमित रूप से बढ़ने लगती है,और गाँठ या ट्यूमर का रूप ले लेती है तब गर्भाशय का कैंसर होता है| इसे बच्चेदानी का कैंसर भी कहते है, इसकी कोशिकाओं में इतनी तेजी से वृद्दि होती है, की यह शरीर के अन्य भागों को भी नुकसान पहुंचा सकती है|

गर्भाशय में दो भाग होते है पहला गर्भाशय का निचला भाग जो योनी में खुलता है| उसे गर्भाशय ग्रीवा कहते है, तथा दूसरा गर्भाशय का उपरी हिस्सा जिसे कार्पस कहते है| जब लोग कहते है की इसे गर्भाशय कैंसर है तो इसका मतलब होता है की उसके कार्पस में कैंसर है| इस तरह का कैंसर पश्चिमी महिलाओं में अधिक पाया जाता है.

गर्भाशय कैंसर ह्युमन पैपीलोमे वायरस के संक्रमण से होता है| यह कैंसर दुसरे कैंसर की तरह वंशानुगत नहीं होता है, विकासशील देशों में यह कैंसर बड़ी तेजी से फ़ैल रहा है| गर्भाशय कैंसर के कारण हर साल लगभग 2 लाख महिलाओं की मौत हो जाती है|

गर्भाशय कैंसर के कारण (Reason Of Uterus Cancer in Hindi)   

  • पीरियड्स जल्दी शुरू होना
  • धुम्रपान
  • मोटापा
  • अधिक दवाइयों के सेवन से
  • सेक्स हार्मोन्स असंतुलन
  • 50 साल के बाद मीनोपोज
  • पारिवारिक इतिहास
  • रात की शिफ्ट में काम करना

हालाँकि इसके सही कारण पूरी तरह से ज्ञात नहीं है, लेकिन उपर बताये गए कारण इसके लिए जिम्मेदार है| वैसे तो यह किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन उम्र बढ़ने के साथ-साथ इसके होने के चांसेज भी ज्यादा है|

गर्भाशय कैंसर के लक्षण (Symptoms Of Uterus Cancer in Hindi)

गर्भाशय कैंसर की जांच (Checking of Uterus Cancer in Hindi)

  • पेल्विक जांच (Pelvic Test)
  • पैप टेस्ट      (Pap Test)
  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)
  • बायोप्सी  (Biopsy)

गर्भाशय कैंसर का इलाज (Treatment Of Uterus Cancer in Hindi)

  • रेडियोथैरेपी  (Radiotherapy)
  • किमोथैरेपी  (Chemotherapy)
  • हार्मोनल थैरेपी  (Hormonal Therapy)
  • सर्जरी (Surgery)

वैसे गर्भाशय कैंसर का सटीक उपचार सर्जरी ही है. लेकिन कुछ स्थितियों में दूसरी विधियों को भी अपनाया जाता है. इसके उपचार में आपकी उम्र, हेल्थ और दुसरे कई करक निर्भर करते है.

गर्भाशय कैंसर से बचाव (Prevention of Uterus Cancer in Hindi)

  • वजन को नियंत्रित रखें|
  • धुम्रपान ना करें|
  • स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं|
  • योग और व्यायाम करें|
  • नियमित जांच करवाएं|
  • गर्भाशय कैंसर के लक्षणों को नजरअंदाज ना करें|
  • अगर आप स्तनपान में सक्षम है तो स्तनपान करवाएं|
  • हरी सब्जियां और फल-फ्रूट का सेवन करें|
  • खुद को एक्टिव रखें|
  • जंक फ़ूड से दुरी बनाये रखें|
  • ग्रीन टी का सेवन करें|
  • शराब से दुरी बनाये रखें|
  • नॉनवेज ना खाएं|
  • असामान्य रक्तस्राव हो तो उसका जल्दी से उपचार करवाएं|

गर्भाशय कैंसर के बारे में कुछ ख़ास बातें

  • यह ब्रेस्ट कैंसर की संभावना को भी बढाता है|
  • हर 70 में से एक महिला को गर्भाशय कैंसर (uterus cancer) होता है|
  • इस बीमारी का सबसे प्रमुख कारण समय पर इसका पता ना चल पाना है|
  • सबसे ख़ास बात यह है की जब तक यह बीमारी गंभीर नहीं होती, तब तक पकड में नहीं आती है|
  • हर 5 गर्भाशय कैंसर पीड़ित महिलाओं में से एक कारण आनुवंशिक होता है|
  • सिर्फ 19 फीसदी महिलाओं को इस बीमारी का पता पहले चलता है, बाकी 75% महिलाएं इस बीमारी के बढ़ जाने के बाद ही इसकी जांच करवाती है|
  • इस कैंसर का फैलाव बड़ी तेजी से होता है और यह गर्भाशय के आस-पास के भागों को भी प्रभावित करने लगता है जैसे लीवर, फेफड़े, दिमाग आदि|
  • अन्य प्रकार के कैंसर की तुलना में इसके मामले थोड़े ज्यादा है|
  • एक शोध के अनुसार रात के शिफ्ट में काम करने वाली महिलाएं इसकी चपेट में ज्यादा आती है| क्योंकि समय पर नींद नहीं ले पाने के कारण नींद के लिए जिमेदार हार्मोन मिलेटोनिन में गड़बड़ी होने लगती है|

आज की इस पोस्ट में आप अच्छे से जान गए होंगे की गर्भाशय कैंसर क्या है| इसके कारण और लक्षण क्या है तथा इससे कैसे बचा जा सकता है, उम्मीद करता हु की आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी| अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और कमेंट बॉक्स में अपने विचार दे|

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